सुप्रीम कोर्ट ने हाथ बांध कर आलोक वर्मा को लौटाई कुर्सी, ये था सीबीआई मुखिया का पूरा विवाद

नाक और साख की लड़ाई तो हमेशा से होती रही है लेकिन जब बात आन-बान-शान की हो तो कई परतें खुलने लग जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ सीबीआई वर्सेज सीबीआई के दो वरिष्ठों की नाक की लड़ाई में। सुप्रीम कोर्ट ने जबरन छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई के मुखिया आलोक वर्मा को 8 जनवरी को बड़ी राहत दी और उन्हें उनके पद पर बहाल कर दिया।
राकेश अस्थाना और आलोक वर्मा की नाक की लड़ाई बढ़ती देख केंद्र सरकार ने दोनों को ही सीबीआई से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद सीबीआई निदेशक ने उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने के मामले को संजीदगी से लिया और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

75 दिनों की लड़ाई के बाद मिली राहत
आज इस मामले में उन्हें 75 दिन बाद राहत मिली है। अदालत ने सरकार के 23 अक्तूबर को दिए आदेश को निरस्त कर दिया है। यानी उनकी पद की गरिमा बरकरार रखा गया है लेकिन उनके हांथों को बांध दिया है। अदालत ने सीवीसी जांच पूरी होने तक वर्मा कोई भी बड़ा निर्णय नहीं लेने का आदेश दिया है। सीबीआई के अतंरिम निदेशक नागेश्वर राव की नियुक्ति को रद्द कर दिया गया है।

फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के आदेश को रद्द करने के बाद आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद पर बहाल कर दिया है। अदालत का कहना है कि डीएसपीई अधिनियम के तहत उच्च शक्ति समिति एक हफ्ते के अंदर उनके मामले पर कार्रवाई करने का विचार करें। जब तक उच्च स्तरीय समिति आलोक वर्मा पर कोई फैसला ने ले वह कोई बड़ा फैसला नहीं ले सकते हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि सरकार को आलोक वर्मा को हटाने के मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश, प्रधान मंत्री और विपक्ष के नेता वाली चयन समिति के पास भेजा जाना चाहिए था। बता दें कि वर्मा का सीबीआई मुखिया के तौर पर कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है।