साक्षात्कार : अंतरिम बजट 2019 के प्रावधानों से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर- पीयूष गोयल

अंतरिम बजट से देश में रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे। प्रत्यक्ष कर में तीन करोड़ लोगों को मिली छूट से निम्न-मध्य वर्ग के लोगों के पास खर्च करने को ज्यादा पैसे बचेंगे। उनके खर्च करने से वस्तुओं एवं सेवाओं की बिक्री बढ़ेगी। साथ ही देश के लिए तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे। यह कहना है वित्त मंत्री पीयूष गोयल का। इन तमाम मुद्दों पर शिशिर चौरसिया ने वित्त मंत्री पीयूष गोयल से बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश:
सवाल: अंतरिम बजट में किसानों और निम्न-मध्य वर्ग पर विशेष ध्यान रहा, लेकिन रोजगारपरक योजनाओं पर खास तवज्जो नहीं दी गई?
अंतरिम बजट में जो प्रावधान किया गया है, उसका सकारात्मक असर रोजगार सृजन पर भी पड़ेगा। हमने पांच लाख रुपये तक की सालाना आमदनी करने वालों को आयकर से मुक्ति दे दी है। इससे उन्हें सालाना 10,000 रुपये से ज्यादा की बचत होगी। इसे वे खर्च कर सकेंगे, जिससे वस्तुओं एवं सेवाओं की मांग बढ़ेगी। इससे उद्योग जगत का विस्तार होगा। ऐसा होने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
सवाल: मध्य वर्ग का कहना है कि पांच लाख से ज्यादा कमाने वालों को कोई लाभ नहीं हुआ। बेहतर होता कि कर छूट की सीमा को 2.5 लाख से बढ़ा कर 3.5 लाख रुपये कर दिया जाता?
पांच लाख रुपये से ज्यादा सालाना कमाई करने को कैसे लाभ नहीं होगा। मैं सीए हूं, इसलिए मुझे बेहतर समझ है कि किसको लाभ होगा। मान लीजिए, आपकी सालाना आमदनी सात लाख रुपये है। आपने 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये का निवेश किया, जिस पर पूरी छूट मिली। न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) में 50,000 रुपये निवेश करने पर भी पूरी छूट मिली। इसका मतलब है कि आपकी सालाना कमाई में से दो लाख रुपये घट गए। अगर आपने मेडिकल बीमा लिया है तो उसमें भी छूट मिलेगी। इस तरह आपकी सालाना कमाई पांच लाख रुपये से भी कम हो गई। ऐसे में आपको आयकर चुकाना ही नहीं पड़ेगा।
सवाल: नोटबंदी के बारे में तरह-तरह की बातें चल रही हैं। कहा जा रहा है कि इससे कोई फायदा नहीं हुआ। आपको क्या लगता है कि यह एक गलती थी?
मैं तो कहूंगा कि नोटबंदी का कदम सही कदम था। इसके अपार फायदे हुए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। कुछ लोगों को इसकी आलोचना करने में ही मजा आता है। लेकिन मैं कहना चाहूंगा कि इसके जरिये काले धन पर मजबूत प्रहार हुआ। भ्रष्टाचार पर लगाम लगा है और इस पर काम चलता रहेगा। आयकर केक्षेत्र में देखें तो रिटर्न फाइलिंग में रिकार्ड बढ़ोतरी हुई। आप देखें तो इस देश की अधिकतर जनता और कारोबारी ईमानदार हैं। ये हमेशा इसी राह पर चलना चाहते हैं। पिछली सरकारों ने इस ईमानदारी का कभी सम्मान नहीं किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार उन्हें यह सम्मान दिया। इसलिए तो मध्यम वर्ग को कर में छूट मिली।
सवाल: आपने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों केलिए वृद्घावस्था पेंशन की घोषणा की है। लेकिन असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को इकट्ठा करना और उन्हें हर महीने एक निश्चित रकम जमा करने के लिए प्रेरित करना मुश्किल कार्य है। कैसे करेंगे इसे?
सरकार ने ऐसा पहली बार नहीं किया है। इससे पहले हमने देश के करोड़ों लोगों को जन धन खाते केसाथ बीमा योजना प्रदान की है। हमने तय किया है कि कच्चा रोजगार करने वाले या दिहाड़ी मजदूरों में से वैसे व्यक्ति जो कि 18 से 40 साल केबीच के हैं, उन्हें बेहद कम रकम नियमित रूप से जमा करने को प्रेरित करें। वह जितनी रकम जमा करेंगे, उतनी ही रकम सरकार भी जमा करेगी। इस तरह से जब वह 60 साल केहोंगे और काम करने के काबिल नहीं होंगे, तब उन्हें हर महीने 3000 रुपये का पेंशन मिलेगा। वह इज्जत से अपना बुढ़ापा काट सकेंगे। उन्हें अपनी जरूरतों केलिए किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना होगा। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को वृद्धावस्था में पेंशन की व्यवस्था वर्तमान सरकार की सोच के साथ मेल खाती है। इसका फायदा 10 करोड़ मजदूरों को मिलेगा।
सवाल: आपने गाय केसंरक्षण एवं संवर्द्घन केलिए राष्ट्रीय कामधेनू आयोग के गठन की घोषणा की है। इसकेकुछ और मायने तो नहीं हैं?
मुझे तो लगता है कि यह काम बहुत पहले हो जाना चाहिए था। गाय को हम माता कहते हैं और यह बात संविधान में स्पष्ट तौर पर उल्लिखित है कि गायों का ख्याल रखना सरकार का काम है। मुझे लगता है कि मैंने यह काम पूरा किया है। यह हमारी जिम्मेदारी थी। इसके कोई और मायने नहीं हैं।