जम्मू कश्मीर में ‘अनुचित सामग्री’ वाली किताबों को लेकर तीन प्रकाशक गिरफ्तार

जम्मू, 
 जम्मू में काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट ने जम्मू-कश्मीर में कुछ किताबों से जुड़े विवाद की मौजूदा जांच के सिलसिले में तीन प्रकाशकों को गिरफ़्तार किया है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। इस निर्णय से पहले जम्मू और दिल्ली में समन्वित अभियान चलाया गया।
संबंधित लोगों की गिरफ्तारी उन किताबों के प्रकाशन और वितरण की बड़ी जांच का हिस्सा हैं, जिनमें अत्यधिक आपत्तिजनक सामग्री होने की बात सामने आई है। अधिकारियों ने बताया कि जांचकर्ता इस सामग्री को छापने और बांटने में प्रकाशकों की भूमिका की बारीकी से जांच कर रहे हैं। 
काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट ने चार जुलाई को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 49 (उकसाना), 61(2) (आपराधिक साजिश), 152 (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालना), 196 (दुश्मनी और अशांति फैलाना) और 353 (गलत बयान, अफवाहें या रिपोर्ट छापना या फैलाना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की। इसके अलावा इस मामले में गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की धारा 13 भी लगाई गई है।  यह कार्रवाई तब की गई जब सरकारी पुस्तकालयों में मिली दो किताबों में अलगाववादी नेताओं का महिमामंडन करने की बात सामने आई।  संबंधित किताबों में एक का शीर्षक जम्मू कश्मीर की हस्तियां एवं दिग्गज है। इसे हिलाल अहमद एवं संतोष मीणा ने लिखा है तथा इसका प्रकाशन जम्मू के ओबेरॉय बुक सर्विस ने किया है।
 दूसरी किताब, जम्मू कश्मीर के महापुरुष है जिसे सुशांत गिरि ने लिखा है। इसे दिल्ली के अनुराग प्रकाशन ने प्रकाशित किया है।
 अधिकारियों के अनुसार, गिरफ़्तार किए गए तीन प्रकाशकों में ओबेरॉय बुक सर्विस के इंदरपॉल और नोएडा स्थित डोमिनेंट पब्लिशर्स के अमरदीप सिंह तथा गिरीश अरोड़ा शामिल हैं।
 इससे पहले, सरकार ने ओबेरॉय बुक सर्विस और डोमिनेंट पब्लिशर्स, दोनों को ही काली सूची में डाल दिया था। काउंटर-इंटेलिजेंस टीमों ने छह जुलाई को उनके परिसरों पर छापा मारा था।
 अधिकारियों ने बताया कि जांच जारी है तथा आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
 अधिकारियों के अनुसार, एक किताब की 123 प्रतियां जम्मू, रामबन और उधमपुर जिलों में बांटी गईं, जबकि दूसरी किताब की 128 प्रतियां जम्मू तथा बारामूला जिलों में भेजी गईं।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को स्कूल शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया था और एक अनुबंधित कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया था। उन्होंने संबंधित दोनों किताबों की जांच के आदेश दिए थे।
 यह कार्रवाई भाजपा, कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों की आपत्तियों के बाद की गई, जिनका आरोप था कि इन किताबों में अलगाववाद को बढ़ावा दिया गया है।
 स्कूल शिक्षा विभाग ने एक आदेश में कहा कि इन दोनों किताबों को तीन जुलाई को ही वापस ले लिया गया था।

 

   

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