मेरे सब्र को कमजोरी न समझा जाए : उमर ने जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा मुद्दे पर कहा
- Sanjay Kulshrestha
- Jul 12, 2026
श्रीनगर, 11 जुलाई
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को केंद्र से कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने के मामले में उनके सब्र को उनकी कमजोरी न समझा जाए। उन्होंने उपयुक्त समय की परिभाषा स्पष्ट करने की भी मांग की। उमर अपनी दादी अकबर जहां की 26वीं पुण्यतिथि के मौके पर हजरतबल में अपने दादा-दादी की मजार पर कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में कश्मीर से पार्टी के वरिष्ठ नेता, सांसद, मंत्री और विधायक शामिल हुए, जबकि (कश्मीर) घाटी के अलग-अलग हिस्सों और दूर-दराज के इलाकों से कार्यकर्ता आए थे।
उमर अब्दुल्ला ने सवाल किया कि अगर केंद्र सरकार लद्दाख के लोगों से बात करने को तैयार है, तो जम्मू कश्मीर के लोगों से क्यों नहीं।
अपनी दादी को श्रद्धांजलि देते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने उनसे बहुत कुछ सीखा है, लेकिन सबसे बड़ी सीख धैर्य रखना है। मुख्यमंत्री ने कहा, हमें धैर्य रखना होगा -- जैसा कि उन्होंने रखा था। धैर्य रखना कमजोरी नहीं है और इसका मतलब यह भी नहीं कि हम चुप रहें।
उन्होंने डल झील के किनारे आयोजित सम्मेलन में कहा, इसका मतलब यह नहीं है कि हमें अपने अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठानी चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि आप हमारे सब्र का नाजायज फायदा उठाएं। इसका मतलब यह नहीं है कि आप हमें कमजोर समझें। यह सब्र ही हमारी ताकत है, यही हमारी आवाज है और ईश्वर ने चाहा तो यही सब्र हमारी कामयाबी का जरिया बनेगा।
अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि सत्ता में आये डेढ़ साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जम्मू कश्मीर की सत्तारूढ़ पार्टी (नेशनल कॉन्फ्रेंस) को जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को विरोध प्रदर्शन करने की जरूरत क्यों पड़ी है।
उन्होंने कहा, जरूर कोई मजबूरी रही होगी। कुछ तो हुआ होगा। मैंने अपने राजनीतिक भविष्य और प्रतिष्ठा को दांव पर लगाकर केंद्र से कहा कि हम हिंसा के बजाय बातचीत के जरिए अपने अधिकार हासिल करना चाहते हैं, जबकि मुझे पता था कि यह फैसला मेरे राजनीतिक करियर के लिए बहुत जोखिम भरा हो सकता है।
इसबीच, नेशनल कॉंफ्रेंस (नेकां) अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद जम्मू कश्मीर के राजनीतिक भविष्य पर चर्चा के लिए 24 जून 2021 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक का संदर्भ देते हुए कहा कि उन्होंने (प्रधानमंत्री ने) इस बात की ओर इशारा किया कि दिल्ली और जम्मू कश्मीर के बीच विश्वास की कमी है।
फारूक ने कहा, प्रधानमंत्री ने उस वक्त कहा था कि इस अंतराल को पाटा जाएगा। लेकिन क्या ऐसा हुआ?... हम भी इंसान हैं। हम भारत का ताज हैं, उसके जूते नहीं। हमारी भी इज़्ज़त है, और हम आपसे (प्रधानमंत्री से) अपील करते हैं कि शांतिपूर्ण तरीके से उस सम्मान को बहाल करें।
उन्होंने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर उपराज्यपाल के जरिए जम्मू कश्मीर में शासन-व्यवस्था पर नियंत्रण करने का आरोप लगाया और कहा, अगर आपको राजभवन के जरिए लोगों को परेशान करना था, कर्मचारियों को नौकरी से निकालना था और बुलडोजर चलवाना था, तो फिर आप हमें आगे क्यों लाए?
उमर अब्दुल्ला ने कहा, उन्हें उस समय ही हमें बता देना चाहिए था कि आप आगे आइए, लेकिन हम आपके हाथ पीछे बांध देंगे। हम आपको ऐसे अधिकारी देंगे जो (आपके) फैसलों को लागू नहीं करेंगे। यह हमारा सब्र ही है कि हम अब भी जम्मू कश्मीर के लोगों के लिए कुछ हासिल करने के वास्ते रात-दिन काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, मैं केंद्र सरकार से पूछता हूं कि आखिर हमें कैसे पता चलेगा कि 'उपयुक्त समय' आ गया है... उस 'उपयुक्त समय' तक पहुंचने के लिए मुझे और मेरे सहयोगियों को आखिर क्या करना होगा?
उन्होंने कहा, अब आप कह रहे हैं कि स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव कराना चाहते हैं। हम भी चाहते हैं कि ये चुनाव हों। लेकिन स्थानीय निकाय चुनाव कराने का उपयुक्त समय क्या होगा, इसका फैसला जम्मू कश्मीर सरकार करेगी।
अब्दुल्ला ने कहा, उपयुक्त समय का तर्क दोनों पक्ष इस्तेमाल कर सकते हैं। आपने हमारे धैर्य, शालीनता और चुप्पी का मजाक बना दिया है। क्या आप यहां आग लगाना चाहते हैं?

