जम्मू-कश्मीर में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की व्यावसायिक खेती को मिलेगा बढ़ावा

जम्मू। स्टेट समाचार
जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने सोमवार को कृषि उत्पादन विभाग (एपीडी) द्वारा तैयार किए गए औषधीय एवं सुगंधित पौधों (एमएपी) की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने संबंधी रोडमैप की समीक्षा की। बैठक में कृषि उत्पादन विभाग, वन विभाग, स्कूास्ट जम्मू एवं कश्मीर, सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू तथा अन्य संबंधित संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को उच्च मूल्य वाले हिमालयी औषधीय पौधों का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में व्यापक रणनीति पर चर्चा की गई।
मुख्य सचिव ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की जैव विविधता, अनुकूल जलवायु और औषधीय पौधों की समृद्ध प्राकृतिक संपदा इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी औषधीय पौधा अर्थव्यवस्था विकसित करने की क्षमता प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र कृषि विविधीकरण, किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार सृजन तथा जैव-अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कृषि उत्पादन विभाग को वन विभाग, आयुष, शोध संस्थानों और निजी क्षेत्र के साथ समन्वय स्थापित कर खेती से लेकर प्रसंस्करण और वैश्विक बाजार तक मजबूत मूल्य श्रृंखला विकसित करने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि कृषि उत्पादन विभाग ने छह वर्षों में लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से एक समग्र मिशन प्रस्तावित किया है। इसके तहत औषधीय एवं सुगंधित पौधों के संरक्षण, वैज्ञानिक खेती, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, अनुसंधान, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, विपणन और निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा। विभाग ने बताया कि वर्तमान में संगठित खेती, प्रसंस्करण ढांचे और विपणन नेटवर्क की कमी के कारण इस क्षेत्र की पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पा रहा है। प्रस्तावित योजना के तहत औषधीय पौधों से समृद्ध क्षेत्रों की जियो-स्पेशियल मैपिंग, 1,500 हेक्टेयर क्षतिग्रस्त वन क्षेत्र का पुनर्जीवन, 51 विशेष नर्सरियों की स्थापना, जंगलों के बाहर खेती का विस्तार, 225 जैव विविधता प्रबंधन समितियों को सशक्त बनाना तथा 500 किसानों को गुड एग्रीकल्चरल एंड कलेक्शन प्रैक्टिस और ऑर्गेनिक प्रमाणन के लिए सहायता प्रदान की जाएगी।
योजना में निजी क्षेत्र की भागीदारी से छह प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र और दो आधुनिक एक्सट्रैक्शन यूनिट स्थापित करने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा ब्रांडिंग और विपणन को मजबूत करने के लिए दो एफपीओ/एमएफपी पार्क, दो मेगा एमएपी क्लस्टर, दो मॉडल एमएपी गांव, एक निर्यात प्रोत्साहन प्रकोष्ठ, डिजिटल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म तथा औषधीय पौधों के क्षेत्र में 80 स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए हर्बल इनोवेशन फंड स्थापित करने की योजना है। विभाग के अनुसार इस मिशन के सफल क्रियान्वयन से औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती का रकबा 1,700 हेक्टेयर से अधिक तक बढ़ाया जा सकेगा। साथ ही 80 स्टार्टअप और 25 निर्यातोन्मुख उद्यम स्थापित होने की संभावना है, जिससे 5,000 से अधिक किसानों और उद्यमियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा तथा बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। मुख्य सचिव ने कहा कि यह पहल जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए आर्थिक समृद्धि के नए अवसर पैदा करेगी।

   

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