चिनार बुक फेस्टिवल के दूसरे दिन पत्रकारिता, कश्मीरियत और संस्कृति पर हुई सार्थक चर्चा

जम्मू। स्टेट समाचार
लगातार हो रही बारिश और घने बादलों के बावजूद चिनार बुक फेस्टिवल के दूसरे दिन रविवार को शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर (एसकेआईसीसी) में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। परिवारों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और पुस्तक प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दूसरे दिन ऑथर्स कॉर्नर में साहित्यिक सत्रों की शुरुआत हुई, जबकि चिल्ड्रन्स कॉर्नर में बच्चों के लिए रचनात्मक कार्यशालाएं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। ऑथर्स कॉर्नर में पहला सत्र "बियॉन्ड द हेडलाइंस : जर्नलिज्म ऐज़ स्टोरीटेलिंग" विषय पर आयोजित किया गया। इस परिचर्चा में दैनिक जागरण के संजीव गुप्ता, पीटीआई के नरेश कौशिक, नवभारत टाइम्स के प्रशांत अस्थाना और हिंदुस्तान टाइम्स की नयनिका सेनगुप्ता ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन जावेद मलिक ने किया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को आधुनिक पत्रकारिता की कार्यप्रणाली, समाचार लेखन, मीडिया की बदलती चुनौतियों तथा डिजिटल युग में पत्रकारों की जिम्मेदारियों से अवगत कराया। इस दौरान बीएचएसएस मुजगुंड, सुल्तान-उल-आरिफीन स्कूल, कश्मीर हार्वर्ड एजुकेशनल इंस्टीट्यूट, ब्लू बेल्स स्कूल, जीएचएसएस रैनावारी, गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज बेमिना तथा गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज कुलगाम के विद्यार्थियों ने पत्रकारिता में करियर, न्यूज़रूम की कार्यप्रणाली, नैतिकता और भविष्य को लेकर अनेक प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने युवाओं से जिज्ञासु बनने, निष्पक्षता बनाए रखने और तथ्यों पर आधारित पत्रकारिता को अपनाने का आह्वान किया।
इसके बाद "उर्दू, कश्मीरियत और साझा सांस्कृतिक परंपरा" विषय पर एक अन्य चर्चा आयोजित की गई। इसका संचालन खुसरो फाउंडेशन, नई दिल्ली के संयोजक डॉ. हफीजुर रहमान ने किया। इसमें कश्मीर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. मुफ्ती मुदस्सिर फारूकी तथा बिरला ओपन माइंड्स इंटरनेशनल स्कूल की अकादमिक प्रमुख आसिया कादिर ने अपने विचार रखे। प्रो. फारूकी ने कहा कि कश्मीर की संस्कृति सूफी और ऋषि परंपरा के गहरे मेल से विकसित हुई है तथा दोनों परंपराओं ने समाज में भाईचारा और सौहार्द को मजबूत किया है। वहीं आसिया कादिर ने कहा कि अनेक भाषाओं का ज्ञान व्यक्ति की सोच का दायरा बढ़ाता है और लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करता है। फेस्टिवल के दूसरे दिन श्रीनगर और आसपास के क्षेत्रों के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से आए चार हजार से अधिक विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। चिल्ड्रन्स कॉर्नर में ढाई हजार से अधिक बच्चों ने रचनात्मक कार्यशालाओं का आनंद लिया। राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय की ओर से आयोजित 'आर्ट सफारी' में बच्चों ने रंग-बिरंगी कागज़ी तितलियां बनाईं तथा शिक्षा मंत्रालय की डिजिटल लाइब्रेरी के बारे में जानकारी प्राप्त की, जिसमें 23 भाषाओं में सात हजार से अधिक ई-पुस्तकें उपलब्ध हैं।
इसके अलावा नेशनल सेंटर फॉर चिल्ड्रन्स लिटरेचर (एनसीसीएल) द्वारा बुक कवर डिजाइन कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता का परिचय दिया। दिन के अंतिम सत्र 'हर्फ-ओ-हुनर : इंग्लिश कैलीग्राफी कार्यशाला' में मलिक मुख्तार ने विद्यार्थियों को सुंदर हस्तलेखन की बारीकियां सिखाईं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में राजा आर्ट एंड कल्चर, दिलशाद कल्चरल फोरम, कालिदास थिएटर ग्रुप और पॉम्पोश फोक थिएटर के कलाकारों ने कश्मीर की पारंपरिक लोक प्रस्तुतियां पेश कर दर्शकों का मन मोह लिया। वहीं शाम को डॉ. शाजिया हमीद, रशीदा अख्तर और आबिद अली की मधुर प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया। फेस्टिवल के तीसरे दिन सोमवार को विशेष आकर्षण के रूप में ग्रुप कैप्टन एवं अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला का संवाद सत्र आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही बच्चों की कार्यशालाएं, साहित्यिक चर्चाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। चिनार बुक फेस्टिवल का आयोजन 26 जुलाई तक एसकेआईसीसी, श्रीनगर में जारी रहेगा।

 

   

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