100 की कथित रिश्वत पर SPO की छुट्टी तीन पुलिसकर्मियों पर जांच कैमरे में दिखे 100 लेकिन इस कथित वसूली का बॉस कौन

कठुआ, 29 सितंबर। जम्मू-कश्मीर के प्रवेश द्वार लखनपुर में नाका चेकिंग के दौरान एक ट्रक चालक से कथित तौर पर ₹100 रिश्वत मांगने और लेने का वीडियो सामने आने के बाद कठुआ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए स्पेशल पुलिस ऑफिसर (SPO) अमीर-उद-दीन को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा दिया है। वहीं, मौके पर तैनात तीन अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है।
 
जानकारी के अनुसार, मामला 27 सितंबर को लखनपुर के ट्रक टर्मिनल प्वाइंट पर नाका चेकिंग ड्यूटी के दौरान का बताया जा रहा है। यहां SPO अमीर-उद-दीन के साथ ASI ज्ञान चंद, हेड कांस्टेबल ध्रुव सिंह और सिलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल शमशेर सिंह भी ड्यूटी पर तैनात थे।
 
पुलिस के अनुसार, लखनपुर पुलिस स्टेशन के SHO के संज्ञान में सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो क्लिप आई। इसमें SPO कथित तौर पर एक ट्रक चालक से ₹100 मांगते और स्वीकार करते दिखाई दिए। रिपोर्टों के मुताबिक, चालक के माल की 'बिल्टी' को लेकर बातचीत के दौरान पैसे मांगे जाने का आरोप सामने आया। मामले का संज्ञान लेते हुए SSP कठुआ मोहिता शर्मा ने SPO को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटाने की कार्रवाई की। साथ ही ड्यूटी पर मौजूद तीन अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की विभागीय जांच के आदेश दिए गए।
 
कैमरे में ₹100, लेकिन सवाल इससे कहीं बड़ा
 
वायरल वीडियो में कथित तौर पर ₹100 का लेन-देन दिखाई देना इस मामले का प्रत्यक्ष पहलू है, लेकिन कार्रवाई के बाद अब कई दूसरे सवाल भी उठ रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या यह केवल एक SPO का व्यक्तिगत कृत्य था या जांच में किसी व्यापक कथित वसूली व्यवस्था के संकेत भी सामने आते हैं?
 
यदि जांच में यह पाया जाता है कि वाहन चालकों से पहले भी इस प्रकार पैसे लिए जाते थे, तो यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि यह सिलसिला कब से चल रहा था, कितने वाहनों से कथित तौर पर रकम ली गई और उसका अंतिम लाभार्थी कौन था।
 
आखिर कथित वसूली का ‘बॉस’ कौन?
 
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा अनुत्तरित सवाल है। क्या कथित ₹100 केवल उसी SPO के पास रहते थे या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका अथवा हिस्सेदारी थी? नाके पर तैनात दूसरे कर्मचारियों को इसकी जानकारी थी या नहीं? क्या ऐसी किसी गतिविधि की जानकारी किसी वरिष्ठ स्तर तक थी?
 
फिलहाल किसी वरिष्ठ अधिकारी या अन्य पुलिसकर्मी को कथित रिश्वत की रकम का लाभार्थी साबित करने वाला कोई पुष्ट तथ्य सामने नहीं आया है। इसलिए किसी व्यक्ति को इस कथित वसूली का 'बॉस' कहना अभी उचित नहीं होगा। इसका जवाब विभागीय जांच के निष्कर्षों से ही मिल सकता है।
 
तीन पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
 
मौके पर तैनात ASI ज्ञान चंद, हेड कांस्टेबल ध्रुव सिंह और सिलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल शमशेर सिंह के खिलाफ विभागीय जांच शुरू होने से मामला केवल SPO की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि ड्यूटी पर मौजूद अन्य कर्मचारियों की भूमिका क्या थी और कथित घटना के संबंध में उन्हें क्या जानकारी थी।
 
जांच की जिम्मेदारी SP (Operations), Border & Kandi, Kathua को सौंपे जाने की बात सामने आई है। जांच पूरी होने के बाद ही अन्य कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
 
जांच में इन सवालों का जवाब जरूरी
 
अब जांच के केंद्र में यह सवाल होना चाहिए कि क्या यह पहली घटना थी या इससे पहले भी वाहनों से कथित तौर पर पैसे लिए जाते रहे हैं? यदि ऐसा था तो प्रतिदिन कितने वाहनों से रकम ली जाती थी? पैसा किसके पास रहता था? दूसरे कर्मचारियों को इसकी जानकारी थी या नहीं? और यदि कोई संगठित कथित वसूली व्यवस्था थी तो उसका संचालन आखिर कौन कर रहा था?
 
लखनपुर जम्मू-कश्मीर का महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है और यहां से बड़ी संख्या में व्यावसायिक तथा मालवाहक वाहन गुजरते हैं। ऐसे में ₹100 के वायरल वीडियो से शुरू हुआ मामला अब जवाबदेही और निगरानी से जुड़े बड़े सवाल खड़े कर रहा है। SPO पर तत्काल कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन अब निगाह विभागीय जांच पर है—क्या जांच की कहानी ₹100 और एक SPO पर खत्म होगी, या इसकी और परतें भी सामने आएंगी?

   

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