सात महीने से मलबे में दबी "जिंदगी' फाइलें बनीं, छत नहीं... ग्रांट कतार में है
- DSS Admin
- May 10, 2026
गरीब की बस्ती में भगवान रहता है, लेकिन मजीठा रोड के गंडा सिंह इलाके में रहते दीपक कुमार सिंह की बस्ती में इन दिनों सिर्फ मजबूरी और सरकारी सिस्टम की बेरुखी का बसेरा है। दीपक का आशियाना बीते 7 माह से मलबे के ढेर में है। पिछली बरसातों में दीपक का मकान ढह गया था। सरकार ने ग्रांट का भरोसा दिया, मगर इसकी फाइलें अभी तक पटवारी और सर्वे के दफ्तरों से बाहर नहीं निकल पाई हैं। दीपक के संघर्ष की कहानी किसी का भी कलेजा चीर देने वाली है। छत सिर पर नहीं थी, जेब में पैसे नहीं थे, लेकिन बेटी के पिता होने का फर्ज निभाना था। दीपक ने बेटी की शादी घर से ढहने से पहले ही तय कर दी गई थी। इसलिए उन्हें इसी टूटे घर के आंगन में, बिना छत के, खुले आसमान के नीचे बड़ी बेटी की शादी करनी पड़ी। आज भी परिवार के 5 सदस्य-पत्नी, दो बेटे और एक बेटी-एक फटी हुई तिरपाल के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं। घर के एक कोने में एक पुरानी मेज रखी है, जिस पर गैस चूल्हा जलता है। यही इस परिवार की रसोई है। दीपक बताते हैं, "जब तेज हवा चलती है तो तिरपाल उड़ जाती है और जब बारिश होती है तो यह टपकने लगती है। उस वक्त हमें पड़ोसियों के घर जाकर रहना पड़ता है। एक खुद्दार इंसान के लिए इससे बड़ी सजा और क्या होगी कि हर बारिश में किसी का दरवाजा खटखटाना पड़े। दीपक कहते हैं कि हादसे की शुरुआत पिछले साल 2 सितंबर को हुई थी। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश उसके कच्चे मकान पर काल बनकर टूटी। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय नेताओं और समाज सेवकों का तांता लगा। आश्वासनों की झड़ी लगा दी गई, फोटो खिंचवाई गईं, लेकिन जैसे ही कैमरे की लाइट बंद हुई, दीपक को उसके हाल पर छोड़ दिया गया। दीपक ने सरकारी सहायता के लिए हर दरवाजा खटखटाया। पटवारी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, प्रशासन की ओर से सर्वे भी पूरा हो चुका है, लेकिन राहत राशि का इंतजार है। डीसी दलविंदरजीत सिंह का कहना है कि पंजाब सरकार की ओर से राशि जारी की गई है। शायद उसमें उसे भी राशि दे दी जाए, अगर ऐसा नहीं हुआ तो उसका भी हल किया जाएगा। अगर सारी कागजी कार्रवाई की गई है तो उसे सरकारी सहायता जरूर मिलेगी। उनका कहना था कि सरकार लोगों की हर मुश्किल के लिए खड़ी है और किसी को कोई परेशानी न हो इस पर ही सरकार काम कर रही है। मलबे में तब्दील दीपक का घर।

