खाद की किल्लत और फसल बर्बादी से कराह रहा किसान, सरकार बनी मूकदर्शक: विनय पटेल

लखनऊ, 3 नवंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश का किसान आज खाद की किल्लत और फसल बर्बादी की दोहरी मार झेल रहा है। चार महीने से किसान खाद के लिए घंटों लाइनों में खड़े हैं। कई जगह किसानों की मौत तक हो रही है। अब जब गेहूं की बुवाई शुरू हो गई है, तब भी हालात नहीं सुधरे हैं। यह बातें आम आदमी पार्टी (आआपा) के अयोध्या प्रांत अध्यक्ष विनय पटेल ने कही। वे लखनऊ प्रदेश कार्यालय में सोमवार को प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि बारिश और आंधी से पूर्वांचल व बुंदेलखंड में फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। झांसी, हमीरपुर और महोबा से किसानों की आत्महत्या की खबरें आ रही हैं, लेकिन सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।

विनय पटेल ने कहा कि किसान अब फसल नहीं, अपनी जान बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार ग्राम पंचायत स्तर पर सर्वे कराकर 20,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दे, जैसा कि पंजाब सरकार दे रही है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए संकट यहीं खत्म नहीं हुआ। धान की फसल तैयार है पर सरकारी क्रय केंद्र बंद हैं। किसान अपने घरों पर 100–200 क्विंटल धान रखे हैं, लेकिन उन्हें 2369 रुपये के बजाय मजबूरी में 1600–1700 रुपये में बेचना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियाँ किसानों को बिचौलियों के हाथों लुटवा रही हैं।

उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से दो मांगें कीं कि फसल बर्बादी पर 20,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए। 10 दिनों के भीतर सभी सरकारी क्रय केंद्र चालू किए जाएं।

विनय पटेल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों की समस्याएं हल नहीं कीं तो आम आदमी पार्टी राज्यव्यापी आंदोलन करेगी। अंत में उन्होंने कहा कि अब किसान जाग चुका है और आम आदमी पार्टी उसकी आवाज बनकर मैदान में उतरेगी। विनय पटेल ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ फसल की नहीं, किसान के भविष्य की है।

हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

   

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