अमृतसर बंद का कार्यक्रम स्थगित:भावनाएं आहत होने पर वाल्मीकि समाज ने किया था ऐलान, अब 9 नवंबर को बैठक; भविष्य की रणनीति पर होगा विचार

वाल्मीकि समाज द्वारा 3 नवंबर को अमृतसर बंद और 4 नवंबर को पूरे पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के पुतले जलाने का जो कार्यक्रम तय किया गया था, उसे फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। समाज की ओर से बताया गया है कि 5 नवंबर को गुरु नानक जयंती पर मेला होगा, जिसके कारण ये निर्णय लिया गया। वाल्मीकि समाज के लोगों ने कहा कि संगत में गुरु नानक जयंती मेले का बहुत उत्साह है। कई स्थानों पर लोग इस उत्सव की तैयारियों में व्यस्त हैं, वहीं कुछ संगतों में डर और असमंजस का माहौल भी है। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए समाज ने निर्णय लिया है कि टकराव या अशांति से बचने के लिए फिलहाल यह कार्यक्रम आगे बढ़ा दिया जाए। प्रकाश पर्व मेले को लेकर उत्साह वाल्मीकि समाज के नेता कुमार दर्शन ने कहा है कि विजय दिवस पंजाब में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है और इस दिन समाज के लोग एकजुट होकर कार्यक्रम आयोजित करते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की विरोध गतिविधि इस पवित्र अवसर की मर्यादा को प्रभावित कर सकती है। तैयारियों के बीच डर और असमंजस का माहौल कहा इस दिन को देखते हुए, अमृतसर के रामतीर्थ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। हम पंजाबवासियों से निवेदन करना चाहते हैं कि आप बिना किसी डर के रामतीर्थ पहुंचे और दर्शन करें। इसलिए अब यह तय किया गया है कि 9 नवंबर को पूरे पंजाब के वाल्मीकि समाज की बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इन बैठकों में आगे की रणनीति और भविष्य की कार्रवाई पर विचार-विमर्श किया जाएगा। जानिए क्यों करना था पुतला फूंक प्रदर्शन वाल्मीकि समाज द्वारा 3 नवंबर को अमृतसर बंद और 4 नवंबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान के पुतले जलाने का जो कार्यक्रम तय किया गया था, उसे समाज ने फिलहाल स्थगित कर दिया है। परंतु यह आंदोलन क्यों शुरू हुआ, इसके पीछे की वजह 27 अक्टूबर को घटित एक घटना से जुड़ी है, जिसने पूरे समाज को आक्रोशित कर दिया था। 27 अक्टूबर की घटना से उपजा रोष वाल्मीकि समाज के नेताओं के अनुसार, 27 अक्टूबर को पावन वाल्मीकि तीर्थ (रामतीर्थ) पर समाज की मर्यादा को ठेस पहुंचाने वाली एक घटना घटी। आरोप है कि गब्बर नाम के एक व्यक्ति ने वाल्मीकि समाज का झंडा लहराते हुए और हथियारों के साथ अनुचित व्यवहार किया, जिससे समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। तीन दिन बीत जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते समाज में गहरा रोष फैल गया। समाज के नेताओं ने मांग की थी कि इस व्यक्ति के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाए और जहां भी बिना अनुमति समाज का झंडा लगाया गया है, उन्हें तत्काल हटाया जाए। 29 अक्टूबर को किया गया था धरना और पुल जाम इन घटनाओं के विरोध में 29 अक्टूबर को अमृतसर में भंडारी पुल को वाल्मीकि समाज द्वारा जाम किया गया। समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। शाम को प्रशासन की अपील पर समाज ने धरना समाप्त किया, इस आश्वासन के साथ कि दो दिनों के भीतर कोई न कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा।

   

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