लुधियाना ग्रेनेड केस में 6 लोगों पर UAPA लगा:पुलिस को पाक कनेक्शन का शक, फरीदकोट जेल से भी जुड़े हैं तार
- Admin Admin
- Nov 01, 2025
लुधियाना में 5 दिन पहले मिले हेंड ग्रेनेड मामले में पुलिस ने 6 आरोपियों पर UAPA (गैर कानूनी गतिविधियां अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। अब UAPA के तहत मामले की जांच शुरू की जा रही है। देर रात करीब 11 बजे आरोपियों पर केस दर्ज हुआ। ग्रेनेड केस में आरोपी कुलदीप, शेखर सिंह, अजय कुमार, परविंदर सिंह, रमनीक सिंह और अजय मलेशिया आतंकी मॉड्यूल से जुड़े हैं। पुलिस अभी तक प्रोडक्शन वारंट पर करणवीर सहित दो अन्य युवकों को लेकर आई है। करणवीर का पाकिस्तान बॉर्डर के नजदीक गांव वहीं बीती रात अजय मलेशिया का भाई विजय, जिसे पुलिस प्रोडक्शन वारंट पर राजस्थान जेल से लाई है। करणवीर और अजय मलेशिया चचेरे भाई हैं। करणवीर का घर पाकिस्तान बॉर्डर से सटा है। इस कारण पुलिस को शक है कि ग्रेनेड पाकिस्तान से सप्लाई हुआ है। पाकिस्तान बॉर्डर से नजदीक गांव संगतपुरा से पुलिस को हेरोइन का पैकेट मिला था। जिस कारण वह जेल में बंद है। आरोपी किस मॉड्यूल के सदस्य हैं, इसका अभी खुलासा नहीं हुआ है। फरीदकोट जेल से भी जुड़े तार बीते दिन भी डीसीपी रुपिंदर सिंह से इस केस के बारे में कहा था कि जल्द ही अधिकारी प्रेस कान्फ्रेंस करके जानकारी देंगे। अभी मामले की जांच चल रही है। इसके अलावा कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ भी पुलिस ने आतंकवाद रोधी अधिनियम की गतिविधियों में यूएपीए के तहत केस को बदला है। इस केस में पहले एक्सप्लोजिव एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इस केस में अब पुलिस फरीदकोट जेल से भी एक कैदी को प्रोडक्शन वारंट पर लाएगी। सांसद अमृतपाल और आतंकी डल्ला पर लगा था UAPA श्री खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह और विदेश में बैठे आतंकी अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला पर यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) लगा था। ये कार्रवाई जिला पुलिस ने पंथक संगठनों से जुड़े गुरप्रीत सिंह हरीनौ हत्याकांड में की थी। जानिए क्या है UAPA एक्ट UAPA गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, जो भारत का एक आतंकवाद विरोधी कानून है और इसे 1967 में पारित किया गया था। इस कानून का उद्देश्य भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ काम करने वाली गैरकानूनी गतिविधियों को रोकना है। 2019 के संशोधन के बाद से, केंद्र सरकार को किसी व्यक्ति को भी 'आतंकवादी' घोषित करने का अधिकार है, जो पहले केवल संगठनों तक ही सीमित था।



