हांसी : चानौत जल आंदोलन के समर्थन में निकाला ट्रैक्टर मार्च, लघु सचिवालय पहुंच ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
- Vijesh Sharma
- Jun 18, 2026


गांव की 103 साल की इमरती देवी ने प्रधानमंत्री
व मुख्यमंत्री के नाम डीसी को ज्ञापन सौंपा
देर रात धरनास्थल पर पहुंची प्रशासनिक टीम को
ग्रामीणों ने लौटाया
हांसी, 18 जून । भाखड़ा पेयजल पाइपलाइन
से टी-कनेक्शन देकर गांव चानौत को पेयजल उपलब्ध करवाने की मांग पर पिछले 33 दिनों से
जारी आंदोलन के चलते पुलिस कार्रवाई के विरोध तथा पहले
से प्रस्तावित चानौत गांव से सैकड़ों ग्रामीणों ने ट्रैक्टर मार्च निकाला तथा 250 से
अधिक ट्रैक्टरों का काफिला धरनास्थल से रवाना होकर जींद रोड के रास्ते लघु सचिवालय
पहुंचा, जहां ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस अवसर धरनास्थल
कमेटी की मौजूदगी में गांव की सबसे वृद्ध 103 वर्षीय इमरती देवी ने डीसी राहुल नरवाल
को ज्ञापन सौंप पानी की मांग की।
इससे पहले बुधवार देर रात मामला उस समय और उग्र हो गया जब प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और
पुलिस की संयुक्त टीम एंबुलेंस व चिकित्सकों के साथ धरनास्थल पर पहुंची। ग्रामीणों
ने आरोप लगाया कि पुलिस आमरण अनशन पर बैठे बुजुर्गों को जबरन उठाने आई थी, जबकि प्रशासन
का कहना है कि टीम केवल स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पहुंची थी। रात करीब दो बजे हुई इस
घटना के बाद गांव में भारी रोष फैल गया।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने उपायुक्त राहुल
नरवाल के समक्ष अपनी तीन मांगें रखी जिनमें गांव के 35 से अधिक लोगों पर दर्ज मुकदमो,
शहर के लिए बिछाई जा रही पाइपलाइन पर टी-कनेक्शन देकर पानी उपलब्ध कराने तथा देर रात
धरनास्थल पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा। इस पर उपायुक्त राहुल नरवाल ने
कहा कि भाखड़ा नहर से हांसी शहर के लिए बिछाई जा रही पाइपलाइन में टी-कनेक्शन लगाने
के मुद्दे पर धरना समिति की कैबिनेट मंत्री रणबीर सिंह गंगवा और महिपाल ढांडा के साथ
दो बार बातचीत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस बारे में धरना कमेटी मामले की वास्तविक
स्थिति से पूरी तरह अवगत हैं और सरकार स्तर पर इस विषय पर विचार किया जा रहा है।
ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमों के संबंध में डीसी
ने कहा कि पुलिस जांच के दौरान यदि कोई मामला तथ्यहीन या झूठा पाया जाता है तो वह स्वतः
ही निरस्त हो जाएगा। किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। ट्रैक्टर मार्च को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह
सतर्क रहा। ग्रामीणों के सचिवालय पहुंचने की संभावना को देखते हुए शहर के अधिकांश प्रमुख
मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन ने केवल जींद रोड के रास्ते ही आंदोलनकारियों
के ट्रैक्टरों को शहर में प्रवेश की अनुमति दी। ग्रामीण अन्य मार्गों से सचिवालय पहुंचना
चाहते थे, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर सभी वैकल्पिक रास्ते बंद कर दिए। डीएसपी रविंद्र सांगवान ने ग्रामीणों
के आरोपों को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि सिविल प्रशासन के अनुरोध पर पुलिस
टीम स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों के साथ आमरण अनशन पर बैठे लोगों का नियमित स्वास्थ्य
परीक्षण करने के लिए पहुंची थी।

