सारण, 28 जून (हि.स.)। गंगा, सरयू एवं सोन नदियों के संगम तट पर अवस्थित पुरातात्विक स्थल चिरांद में 19वें चिरांद चेतना महोत्सव सह गंगा गरिमा रक्षा संकल्प समारोह का आयोजन कल होने जा रहा है।
चिरांद विकास परिषद के सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि इस आयोजन के माध्यम से चिरांद की सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की पहल की जा रही है।
इस महोत्सव के अंतर्गत पुरातात्विक स्थल स्थित भवन में एक विशेष चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा।
इस प्रदर्शनी का उद्देश्य आगंतुकों को प्राचीन भारत के सतत विकास मॉडल, समृद्ध कृषि संस्कृति, नदी सभ्यता तथा चिरांद के ऐतिहासिक महत्व से पूरी तरह परिचित कराना है। प्रदर्शित किए जाने वाले विभिन्न चित्र और शोध सामग्रियां यह दर्शाएंगी कि हजारों वर्ष पूर्व भी हमारी भारतीय सभ्यता प्रकृति के साथ संतुलित विकास पर आधारित थी।
इसके अतिरिक्त, चिरांद का धार्मिक और पौराणिक महत्व भी बेहद खास है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, भगवान श्रीराम, लक्ष्मण एवं उनके गुरु महर्षि विश्वामित्र जनकपुर की यात्रा के दौरान इसी त्रिवेणी संगम क्षेत्र में रात्रि विश्राम के लिए रुके थे।
इसी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए, इस महोत्सव के अवसर पर चिरांद को राम अभ्युदय यात्रा केंद्र के रूप में विकसित करने का एक प्रस्ताव भी रखा जाएगा।
आयोजकों ने अधिक से अधिक नागरिकों, इतिहास प्रेमियों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा श्रद्धालुओं से इस ऐतिहासिक महोत्सव में बढ़-चढ़कर सहभागिता करने की अपील की है, ताकि चिरांद की समृद्ध विरासत एवं गंगा संरक्षण के पावन संकल्प को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
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