जल संरक्षण और प्रदूषण पर सख्ती होगी - मंत्री अग्निमित्रा पाल

कोलकाता, 02 जून (हि. स.)। शिशु व कल्याण तथा नगर विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल मंगलवार को कोलकाता तथा आसपास इलाके में जल जमाव की समस्या को लेकर विभिन्न इलाकों के दौरे पर हैं। उन्होंने इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मानसून के आगमन से पहले राज्य सरकार जल जमाव की समस्या से निपटने के लिए व्यापक तैयारी कर रही है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर दक्षिण बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों में नालों, नहरों और कलवर्टों की सफाई का काम शुरू किया गया है। कई स्थानों पर पूर्व में राजनीतिक कारणों से जलनिकासी के रास्ते बंद कर दिए गए थे, जिससे बरसात के दौरान जलजमाव की समस्या बढ़ी है। अब ऐसे सभी अवरोधों को हटाकर पानी की निकासी सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि कोलकाता सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में जहां जल जमाव की समस्या गंभीर है, वहां बड़े पाइपों के माध्यम से अतिरिक्त पानी को नजदीकी जलाशयों और जलस्रोतों तक पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है। इससे एक ओर जलजमाव की समस्या कम होगी, दूसरी ओर जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में जल संकट बढ़ रहा है, इसलिए वर्षा जल के संरक्षण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

अग्निमित्रा पाल ने बताया कि अगले वर्ष से बड़े स्तर पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग की योजना लागू की जाएगी। भवनों में वर्षा जल संग्रहण की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जाएगा ताकि संचित जल का उपयोग कपड़े धोने, शौचालय और अन्य घरेलू कार्यों में किया जा सके। इस संबंध में विभिन्न विभागों के साथ शनिवार को एक महत्वपूर्ण बैठक भी प्रस्तावित है।

अवैध अतिक्रमण के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री इस विषय को लेकर काफी गंभीर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कानून के दायरे में की जाएगी, लेकिन यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी गरीब व्यक्ति की आजीविका पर अनावश्यक असर न पड़े। सरकार चाहती है कि सभी पक्षों को साथ लेकर अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। वहीं, गंगा नदी में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ भी सरकार सख्त रुख अपनाने जा रही है।

मंत्री ने कहा कि महेशतला और आसपास के क्षेत्रों में स्थित कुछ जींस निर्माण इकाइयों द्वारा एसिड युक्त अपशिष्ट जल को गड्ढों में फेंका जा रहा है, जो बाद में गंगा में पहुंचकर नदी के जल को प्रदूषित कर रहा है। ऐसे कारखानों को नोटिस जारी किया जाएगा और उन्हें प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक मशीनें लगाने का निर्देश दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई इकाई प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों का पालन नहीं करती है तो उसके संचालन पर रोक लगाई जा सकती है।

मंत्री ने कहा कि सरकार जलनिकासी, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को समान प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है ताकि मानसून के दौरान लोगों को राहत मिल सके और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो।

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