अंकित सोनी सुसाइड प्रकरण : आरोपित युवती पर ढाई हजार रुपये का इनाम घोषित
- DSS Admin
- Jun 25, 2026
चित्तौड़गढ़, 25 जून (हि.स.)। जिले के बस्सी थाना क्षेत्र में चर्चा में रहे अंकित सोनी सुसाइड मामले में आरोपित युवती के खिलाफ अब पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए ढाई हजार रुपए का ईनाम घोषित किया है। हालांकि पहले गिरफ्तारी को लेकर युवती की ओर से राजस्थान उच्च न्यायालय से राहत मिली थी लेकिन उसके बावजूद युवती ने सरेंडर नहीं किया है। अब जिला पुलिस अधीक्षक ने 5 जून काे राजस्थान पुलिस नियम की धारा 4.18 के तहत युवती खुशबू पुत्री गोपाल गदिया के विरूद्ध ढाई हजार रुपए का ईनाम घोषित किया है। यह मामला 3 नवम्बर 2025 को बीएनएस की धारा 108 के तहत बस्सी थाने में दर्ज किया गया था। इस मामले को लेकर कस्बे में चर्चाओं का दौर जारी है।
बस्सी कस्बे के निवासी अंकित सोनी ने 3 नवम्बर की रात को अपने काका के घर के कमरे में फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में मृतक के भाई ने बस्सी कस्बे की ही युवती के विरूद्ध मानसिक प्रताड़ना, दबाव बनाने और आत्महत्या के लिए मजबूर करने की रिपोर्ट थाने में दी थी। आरोप है कि युवती ने अंकित को वीडियो कॉल कर परेशान किया और कुछ दिन पहले ही उसकी सगाई हुई थी। इसी दबाव के चलते उसने आत्महत्या कर ली। बस्सी थाने में मामला दर्ज होने के बाद युवती फरार हो गई और उच्च न्यायालय से गिरफ्तारी पर रोक लग गई थी। सुनवाई के दौरान आत्मसमर्पण करने की बात कही गई लेकिन युवती ने आत्म समर्पण नहीं किया। अब पुलिस ने इस मामले में ईनाम घोषित किया है।
इस मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मृतक युवक का मोबाइल जांच के लिए लिया और इसमें चैट और डिजीटल भुगतान संबंधी खर्चों के प्रमाण मिले। मृतक युवक ने कई बार युवती के शॉपिंग और व्यक्तिगत खर्चों के साक्ष्य मिले थे। कई मैसेज डिलीट पाए जाने पर पुलिस ने डाटा रिकवरी कराई और पुख्ता प्रमाणों के बाद युवती को आरोपी माना गया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि सगाई के बाद भी अंकित सोनी और युवती लगातार सम्पर्क में थे।
बस्सी थाने में प्रकरण दर्ज होने के बाद युवती की ओर से उच्च न्यायालय में याचिका लगाई थी और पहले गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगी बाद में अग्रिम जमानत याचिका का निस्तारण करते हुए गत 24 मार्च को उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि 15 दिन में आत्म समर्पण करने पर निचली अदालत जमानत अर्जी का निस्तारण कर सकती है और पुलिस रिमांड मांगे जाने पर निचली अदालत स्वतंत्र है। 15 दिन का समय निकलने के बाद न्यायालय मेें आत्मसमर्पण नहीं किया। उसके बाद से ही पुलिस लगातार युवती की तलाश में जुटी थी और इसके बाद ढाई हजार रुपए का ईनाम घोषित किया गया।
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