सेब पर मौसम की मार, हिमाचल में ब्लूबेरी को बनाया जा रहा नया विकल्प

शिमला, 29 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश की पहचान सेब बागवानी से जुड़ी रही है, लेकिन बदलते मौसम ने इस फसल के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। बढ़ते तापमान, कम होते चिलिंग आवर्स और बेमौसम मौसम के असर के बीच प्रदेश सरकार अब ब्लूबेरी को बागवानों की आय बढ़ाने वाली नई फसल के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। राज्य में पहली बार ब्लूबेरी की व्यावसायिक खेती के लिए 12 उन्नत किस्मों के करीब पांच लाख पौधे तैयार किए गए हैं। पिछले दिनों सोलन जिले में बागवानी विभाग द्वारा ब्लूबेरी की खेती पर किया गया प्रायोगिक ट्रायल सफल रहा है।

सरकार का मानना है कि ब्लूबेरी आने वाले समय में हिमाचल के बागवानों के लिए आय का एक नया स्रोत बन सकती है। बाजार में इसकी कीमत 800 रुपये से 2000 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिल रही है। कम क्षेत्र में इसकी खेती से अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है। इसी संभावना को देखते हुए कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर, डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, बजौरा, खड़ापत्थर और जोगेंद्रनगर में इसके परीक्षण किए गए। इन स्थानों पर मिले अच्छे परिणामों के बाद अब इसकी व्यावसायिक खेती का रोडमैप तैयार किया गया है।

करीब पांच लाख पौधे, 12 उन्नत किस्में

बागवानी विभाग ने प्रदेश के अलग-अलग ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए ड्यूक, लैगेसी, ब्लूक्रॉप, स्पार्टन और इलियट समेत 12 उन्नत किस्मों का चयन किया है। पौधों को टिशू कल्चर तकनीक से तैयार किया गया है और इन्हें चरणबद्ध तरीके से किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। एक पौधे की कीमत करीब 600 रुपये रखी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार ब्लूबेरी की खेती पॉलीहाउस और नियंत्रित वातावरण में अच्छे परिणाम देती है। एक बार पौधे तैयार हो जाने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन मिलता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है और निर्यात की भी अच्छी संभावनाएं हैं।

सुपरफूड के रूप में बढ़ रही मांग

ब्लूबेरी को स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। इसमें एंथोसायनिन, टेरोस्टिलबिन, फाइबर और विटामिन ए, सी तथा ई प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण इसे सुपरफूड की श्रेणी में रखा जाता है और दुनिया भर में इसकी मांग बढ़ रही है।

प्रदेश के बागवानी सचिव सी. पालरासु ने कहा कि ब्लूबेरी को हिमाचल में सेब के एक मजबूत विकल्प के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वे कम क्षेत्र में अधिक लाभ कमा सकें। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हिमाचल प्रदेश को देश का प्रमुख ब्लूबेरी उत्पादक राज्य बनाना है।

जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हो रही सेब अर्थव्यवस्था

बता दें कि प्रदेश की करीब 5,000 करोड़ रुपये की सेब अर्थव्यवस्था पर जलवायु परिवर्तन का असर साफ दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ वर्षों में सेब का क्षेत्र बढ़ा है, लेकिन उत्पादन में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वर्ष 2022-23 में प्रदेश में 1.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सेब की खेती हुई और 3.36 करोड़ पेटियों का उत्पादन दर्ज किया गया। वर्ष 2023-24 में उत्पादन घटकर 2.11 करोड़ पेटी और 2024-25 में 2.51 करोड़ पेटी रह गया। वर्ष 2025-26 में उत्पादन बढ़कर 3.40 करोड़ पेटी पहुंचा, लेकिन मौजूदा सीजन में 2.40 करोड़ पेटी से भी कम उत्पादन का अनुमान है। बढ़ता तापमान, चिलिंग आवर्स की कमी, ओलावृष्टि, तेज हवाएं और बेमौसम बारिश उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर रहे हैं।

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