यूपी के 75 जिलों में गूंजे संस्कृति के स्वर, कलाकारों ने दिया जन-जागरूकता का संदेश

वाद्य यंत्र बजाते कलाकार

लोकगीत, लोकनृत्य और नुक्कड़ नाटक से जनता तक पहुंचीं विकास योजनाएं

लखनऊ, 19 जून (हि.स.)। केन्द्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर उत्तर प्रदेश में 5 जून से 21 जून 2026 तक समेकित जन-कल्याण एवं जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत प्रदेशभर में विकास प्रदर्शनियों और जनहित से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में संस्कृति विभाग द्वारा 17, 18 और 19 जून को सभी 75 जनपदों में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में लोक संस्कृति का भव्य संगम

इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का समापन शुक्रवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में भव्य आयोजन के साथ हुआ। इस अवसर पर लोकगायन और लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से सरकार की विभिन्न जनहितकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी आमजन तक पहुंचाई गई। लोकगायिका मंगलम भारद्वाज और नीतू श्रीवास्तव ने अपनी मधुर लोकगायन प्रस्तुतियों से माहौल को लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया। वहीं लोकनृत्यांगना स्वाति श्रीवास्तव और उनकी टीम ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। गीत, संगीत और नृत्य के माध्यम से सरकार की योजनाओं को सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।

स्थानीय कलाकारों ने दिया जन-जागरूकता का संदेश

प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि, इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी जनपदों में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में 450 दलों के हजारों स्थानीय कलाकारों ने भाग लिया। कलाकारों ने लोकगीत, लोकनृत्य, कठपुतली, नुक्कड़ नाटक और अन्य सांस्कृतिक विधाओं के माध्यम से एक साथ जन-जागरूकता का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि इस पहल से न केवल स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला, बल्कि आमजन भी प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ सके।

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ने बताया कि सांस्कृतिक कार्यक्रम केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज को जागरूक करने और विकास योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने का प्रभावी साधन भी हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के आयोजन सांस्कृतिक चेतना को सशक्त बनाने, कलाकारों को प्रोत्साहित करने और आम जनता को सरकार की उपलब्धियों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं। यही कारण है कि सांस्कृतिक गतिविधियों को जनसंपर्क और जन-जागरूकता अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है।

   

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