अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय में मनाया गया संग्रहालय दिवस

वैश्विक थीम एक विभाजित विश्व को जोड़ते संग्रहालय पर प्रबुद्ध विचारकों ने किया मंथन

अयोध्या, 18 मई (हि.स.)। निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर एक भव्य सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय परिषद द्वारा निर्धारित वैश्विक विषय (थीम) एक विभाजित विश्व को जोड़ते संग्रहालय पर देश के प्रबुद्ध इतिहासकारों, पुरातत्वविदों, प्रबंधकों और कला संरक्षकों ने अपने गंभीर विचार साझा किए।

शंखनाद और दीप प्रज्वलन से शुरुआतकार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं उद्घाटनकर्ता प्रो. हिमांशु शेखर सिंह (डीन, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय), डॉ संजीव कुमार सिंह (निदेशक अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय) एवं अन्य सम्मानीय विशिष्ट अतिथियों जयवर्धन सिंह, शिवदास सिंह, वीरेंद्र कुमार वर्मा, अक्षय, नरपत, मयंक चौहान, शरद शर्मा आदि द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर अतिथियों का अंगवस्त्र भेंट कर अभिनंदन किया गया। मंच का संचालन संग्रहालय की सहायक संग्रहालय अध्यक्ष (असिस्टेंट क्यूरेटर) ऋचा रानी द्वारा किया गया।

समारोह में अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय निदेशक डॉ. संजीव कुमार सिंह इस वर्ष की थीम की वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान श्री राम की कथा वैश्विक स्तर पर समाज को जोड़ने का कार्य करती है। इसके साथ ही उन्होंने संग्रहालय की अत्याधुनिक २० दीर्घाओं की महत्ता और उनके क्रमिक विकास के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

डॉ. र.म.लो. अवध विवि डीन एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, प्रबंधन विभाग, प्रो. हिमांशु शेखर सिंह ने अपने वास्तविक जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए इस तकनीकी और 'टेक-सैवी' दुनिया में संग्रहालयों की अपरिहार्य भूमिका को रेखांकित किया।

पुरातत्व विभाग गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय में शोधार्थी मयंक चौहान ने उन प्राचीन साहित्यिक स्रोतों और साक्ष्यों को प्रस्तुत किया जो वैश्विक स्तर पर भगवान राम की अनमोल विरासत और उनके प्रभाव को प्रमाणित करते हैं।

   

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