सरकार का दावा- देश में पेट्रोल-डीजल और घरेलू रसोई गैस का पर्याप्त भंडार
- DSS Admin
- Jun 08, 2026
नई दिल्ली, 08 जून (हि.स)। केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट के बादजूद कच्चे तेल, एलपीजी और नेचुरल गैस की सप्लाई स्थिर बनी हुई है। सरकार ने बताया कि हमारे पास देश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
पेट्रोलियम एवं नेचुरल गैस मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव प्रवीण एम. खानूजा ने नई दिल्ली में अंतर-मंत्रालयी प्रेसवार्ता में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी मौजूदा हालात के बावजूद कच्चे तेल, एलपीजी और नेचुरल गैस की सप्लाई स्थिर बनी हुई है। घरेलू रिफाइनरियों और फ्रैक्शनटर्स से एलपीजी का घरेलू उत्पादन अधिकतम स्तर पर है। वे रोजाना लगभग 52-53 हजार मीट्रिक टन (टीएमटी) उत्पादन कर रहे हैं, जो संकट से पहले के स्तर से लगभग 60 फीसदी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर स्टॉक खत्म होने की कोई खबर नहीं है। इसके साथ ही एलपीजी डिलीवरी का बैकलॉग घटकर 4 दिन से भी कम हो गया है, जबकि 99 फीसदी एलपीजी सिलेंडर बुकिंग अब ऑनलाइन होती हैं। वहीं, डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) का अनुपालन रेट लगभग 96 फीसदी है।
रसायन और उर्वरक मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने संवाददाताओं से कहा कि मौजूदा खरीफ सीजन के लिए फर्टिलाइज़र की खरीद 86.65 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) तक पहुंच गई है, जो कुल जरूरत का 22.57 फीसदी है। उन्होंने कहा कि किसानों ने 11.17 एलएमटी ऑर्गेनिक खाद भी खरीदी है, जबकि पिछले साल इसी समय यह 3.20 एलएमटी थी। इससे पता चलता है कि ऑर्गेनिक न्यूट्रिएंट सोर्स की ओर झुकाव बढ़ रहा है। अपर्णा एस. शर्मा ने बताया कि फिलहाल फर्टिलाइजर की उपलब्धता में कोई बड़ी चुनौती नहीं है। घरेलू उत्पादन और आयात जारी है और अब तक 147.40 एलएमटी फर्टिलाइजर का उत्पादन या आयात किया जा चुका है। जून में 25,000 मीट्रिक टन से ज्यादा आयातित यूरिया, डीएपी और एनपीके फर्टिलाइजर बंदरगाहों पर पहुंचे हैं।
इसके अलावा बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि आज दोपहर करीब 1:30 बजे एमटी मैरीवेक्स जहाज पर आग लगने की घटना की सूचना मिली है। घटना के समय जहाज पर 24 भारतीय नाविक मौजूद थे। सभी भारतीय नाविक अभी सुरक्षित हैं। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हम विदेश मंत्रालय, विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों, भारतीय नौसेना और रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
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