युद्ध का मैदान बदल रहा इसलिए आने वाली जंगें हवा में हुआ करेंगी : एयर चीफ

- 'ऑपरेशन सिंदूर' में पहली बार भारत-पाक संघर्ष के दौरान ड्रोन सबसे पसंदीदा हथियार बने

नई दिल्ली, 15 मई (हि.स.)। युद्ध का मैदान बदल रहा है इसलिए आने वाली जंगें हवा में हुआ करेंगी। यही वजह रही कि 'ऑपरेशन सिंदूर' में पहली बार भारत-पाक संघर्ष के दौरान ड्रोन सबसे पसंदीदा हथियार बने। ड्रोन आने वाले रोबोटिक युद्ध का सिर्फ शुरुआती एक्शन हैं। आने वाले समय में तीनों सेनाएं एक ही एयर में ऑपरेट करेंगी। इसके लिए अंतरिक्ष में भी आपसी तालमेल होना चाहिए। हवा में युद्ध करने से ऑपरेशन के दौरान इंसानों की जान का खतरा कम होता है और कम कीमत ही युद्ध लड़ा जा सकता है।

इस तरह के विचार नई दिल्ली के एयरफोर्स ऑडिटोरियम में एक एयरोस्पेस पावर सेमिनार में शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने रखे हैं। स्वायत्त रक्षा थिंक टैंक सेंटर फॉर एयरपावर एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज के सहयोग से यह संयुक्त गोष्ठी आयोजित की गई। इस सेमिनार में वरिष्ठ सैन्य हस्तियों, क्षेत्र के विशेषज्ञों और विशिष्ट प्रतिभागियों को एयरोस्पेस क्षमता बढ़ाने में रखरखाव दक्षता और आत्मनिर्भरता की महत्वपूर्ण भूमिका पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ लाया गया। इस सेमिनार में भारत की वायु सेना को मजबूत करने के उद्देश्य से बनाई गई नीतिगत रूपरेखाओं पर केंद्रित पैनल चर्चाएं हुईं। विशेषज्ञों ने रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के राष्ट्रव्यापी विजन के अनुरूप रखरखाव रणनीतियों को अपनाने पर अपने विचार साझा किए।

वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि 'ड्रोन और अनमैन्ड एरियल (यूए) सिस्टम का यह विषय बहुत प्रासंगिक है, यह एक सच्चाई है। इसलिए इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि लड़ाई का मैदान बदल गया है। हम केंद्रित वायु शक्ति से विकेंद्रीकृत तक और स्वायत्त तरीके से शिफ्ट हो रहे हैं। हमें यह समझना होगा कि यूए सिस्टम हवाई शक्ति का ही विस्तार हैं। इस तरह के ऑपरेशन के दौरान इंसानी जान का खतरा भी कम होता है। जैसा कि मैंने कहा कि यह एयर पावर का ही एक्सटेंशन है, इसलिए जब आप यूए सिस्टम का इस्तेमाल करेंगे, तो एयर पावर के सभी नियम लागू होंगे। जब हम काउंटर यूए सिस्टम की बात करते हैं, तो यह चूहे-बिल्ली के खेल जैसा है।'

वायु सेना प्रमुख ने कहा कि 'जब आप एक क्षेत्र में तकनीक विकसित करते हैं तो काउंटर प्रौद्योगिकी को भी उसके साथ विकसित होना पड़ता है क्योंकि इसी तरह से खेल खेला जा सकता है। मुझे लगता है कि हमने 'ऑपरेशन सिंदूर' में काफी अच्छा किया है और यह इसलिए संभव था क्योंकि सेनाओं में आपसी तालमेल था। किसी केंद्रीय एजेंसी के सहयोग बगैर यह संभव नहीं होता। हमारे पास एक ढांचा है, ताकि हर बार हम इन चीजों का मुकाबला कर सकें।' उन्होंने कहा कि 'इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि लड़ाई का मैदान बदल गया है इसलिए हमें समझना होगा कि ड्रोन, काउंटर यूए सिस्टम और अनमैन्ड एरियल सिस्टम एयर पावर का ही हिस्सा हैं। वे इसलिए सफल हो रहे हैं क्योंकि उनमें एयर पावर की सभी अंदरूनी खूबियां हैं।'

भारतीय सेना के एविएशन कॉर्प्स के डायरेक्टर जनरल और कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल विनोद नांबियार ने कहा कि 'यह इवेंट सिर्फ एक सेमिनार नहीं है बल्कि इसका मकसद साफ और जरूरी है क्योंकि यहां उद्योग और सेना को बातचीत के लिए एक मंच मिलेगा, भारतीय और वैश्विक कंपनियों की आधुनिक तकनीक को दिखाया जाएगा। साथ ही स्वदेशीकरण और प्रणालियों का संयुक्त विकास के लिए मिलकर काम करने के रास्ते तलाशे जाएंगे। कल की लड़ाई का मैदान इस बात से तय होगा कि हम अनमैन्ड सिस्टम्स का कितने असरदार तरीके से इस्तेमाल करते हैं और उनसे कितनी मजबूती से बचाव करते हैं। अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स ने पहले ही दुनिया भर में मिलिट्री के तरीकों को बदल दिया है। यूएवी अब मल्टी-डाइमेंशनल हैं, जिसमें वे लॉजिस्टिक्स, कम्युनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, सर्च एंड रेस्क्यू, मैरीटाइम पेट्रोल और डिफेंस को सपोर्ट करते हैं।'

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने इस बात पर जोर दिया कि ट्राई सर्विस एनर्जी और यूएएस, यूए और काउंटर यूएएस में एकीकरण बनाना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि देश की रक्षा के लिए हमारी तीनों सेनाओं की ऑपरेशनल आजादी के लिए एक सामरिक जरूरत भी है। कोई भी अकेली सर्विस अगला युद्ध अकेले नहीं लड़ सकती। सिर्फ सामूहिक नेतृत्व, एकीकृत सिस्टम, और साझा स्थितिजन्य जागरूकता ही आगे की लड़ाइयों में निर्णायक जीत दिला सकती है। हमने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर की पहली सालगिरह मनाई, जिसमें स्पीड, ताकत और प्रिसिजन ने एक निर्णायक नतीजा दिया।

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