1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट के अपहरण और हत्या के सभी आरोपियों पर मुकदमा चलाया जाए और पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए उन्हें कड़ी सजा दी जाए -भाजपा

श्रीनगर, 02 जुलाई (हि.स.)। जम्मू और कश्मीर भाजपा इकाई ने गुरुवार को मांग की कि अप्रैल 1990 में युवा कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट के अपहरण और हत्या के सभी आरोपियों पर मुकदमा चलाया जाए और पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए उन्हें कड़ी सजा दी जाए।

श्रीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जम्मू-कश्मीर भाजपा के मुख्य प्रवक्ता सुनील सेठी ने कहा कि भट कश्मीर की बेटी थीं और उन्होंने कश्मीर की मिश्रित संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने कहा कि उन्हें, उनके परिवार को, समुदाय को और पूरे कश्मीर को न्याय के लिए 36 साल इंतजार करना पड़ा। न्याय अधूरा है, यह अपूर्ण है। उनका हत्यारा पाकिस्तान में है। उन्होंने कहा कि जब उसे यहां लाया जाएगा और उस पर मुकदमा चलाया जाएगा तभी न्याय पूरा होगा।

जम्मू-कश्मीर राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) ने सोमवार को 700 से अधिक पृष्ठों की आरोपपत्र दाखिल की जिसमें प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक को अप्रैल 1990 में आतंकवादियों द्वारा भट के अपहरण और क्रूर हत्या के मामले में मुख्य आरोपी बनाया गया है। एजेंसी ने इसे आतंकवाद के पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया।

एसआईए जिसने 2024 में मामला सौंपे जाने के बाद इसे फिर से खोला ने यहां नामित एनआईए अदालत में आरोपपत्र प्रस्तुत किया है।

सरला शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसकेआईएमएस) सौरा में नर्स के रूप में कार्यरत थी।

सेठी ने कहा कि पूरे कश्मीरी समाज को इस मामले में अभियोजन पक्ष की मदद के लिए खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम सरकार और अभियोजन एजेंसियों से अपील करते हैं कि वे इस मामले को मजबूती से उठाएं ताकि हत्यारों को कड़ी सजा मिल सके। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग अभी भी कानून की गिरफ्त से बाहर हैं उन्हें जल्द से जल्द पकड़ा जाना चाहिए और उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए और उन्हें कड़ी सजा दी जानी चाहिए।

भाजपा के मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले में न्याय मिलने से यह सुनिश्चित होगा कि भविष्य में कश्मीर में एक बार फिर एक समरूप समाज स्थापित हो जहां सभी धर्मों के लोग एक साथ रह सकें। उन्होंने कहा कि अगर कश्मीरी समाज भट को अपनी बेटी नहीं मानता तो यह कश्मीर के लिए एक बड़ी विफलता है। पूरा देश, पूरी दुनिया कश्मीर की ओर देख रही है - समाज को खुलकर सामने आना चाहिए।

सेठी ने मामले को सुलझाने के लिए जांच एजेंसियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सब केवल नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एक मजबूत सरकार के तहत ही संभव हो पाया।

केएलएफ प्रमुख यासीन मलिक का जिक्र करते हुए सेठी ने कहा कि आरोपी जिसके इशारे पर हत्या हुई, प्रधानमंत्रियों के साथ बैठता था। (पूर्व प्रधानमंत्री) मनमोहन सिंह उसे अपने घर बुलाया करते थे। जिन लोगों के हाथ खून से सने हैं, चाहे वह भट का हो या दूसरों का उन्हें कांग्रेस शासन के दौरान प्रधानमंत्री आवास पर आमंत्रित किया जाता था। उन्होंने जोर देकर कहा कि मोदी के सत्ता में आने के बाद न्याय मिल रहा है। भाजपा नेता ने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों को आरोपियों का बचाव करते या उनका समर्थन करते देखना दुखद है।

उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का मानना है कि इस मामले को दोबारा खोलने से कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी में बाधा आ सकती है। यह कैसी सोच है। उन्होंने कहा कि अगर कश्मीरी पंडितों की वापसी लड़कियों के साथ हुए बलात्कार और हत्या को भुलाने पर आधारित है तो ऐसा कोई नहीं चाहता। वापसी होगी और न्याय पर आधारित होगी। मलिक के अलावा जो उस समय जम्मू-कश्मीर लोक लुटेरे संघ का स्वयंभू कमांडर-इन-चीफ था, उसके चार साथियों - खुर्शीद अहमद चल्को, अब्दुल हामिद शेख, गुलाम मोहम्मद तपलू और मोहम्मद यूसुफ सोफी को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है। माना जाता है कि चल्को कश्मीर से भागकर पाकिस्तान में रह रहा है। आरोपियों पर आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (टीएडीए), 1987 और भारतीय शस्त्र अधिनियम, 1959 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

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