भाजपा ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, उच्च स्तरीय जांच की मांग

शिमला, 06 जुलाई (हि.स.)। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता और विधायक राकेश जमवाल ने हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कामकाज को लेकर प्रदेश सरकार से उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बोर्ड में प्रशासनिक फैसलों, नियुक्तियों, उद्योगों को कंसेंट (अनुमति) जारी करने की प्रक्रिया और अपीलीय व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। सरकार को इन सभी मामलों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

राकेश जमवाल ने सोमवार को एक बयान में कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में सदस्य सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे अधिकारी की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में अपीलीय प्रक्रिया भी प्रभावित होने की आशंका दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था में फैसला लेने वाला अधिकारी और अपील सुनने वाला प्राधिकारी अलग-अलग होना चाहिए। इससे पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहती है। यदि ऐसा नहीं है तो पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।

भाजपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि उद्योगों को कंसेंट जारी करने और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक पत्राचार का संचालन कुछ चुनिंदा अधिकारियों के माध्यम से किया जा रहा है। उनके अनुसार इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन मामलों में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार किसके पास है और क्या सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार पूरी की गई हैं।

राकेश जमवाल ने कहा कि यदि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का काम पूरी तरह नियमों और पारदर्शिता के अनुसार हुआ है तो सरकार को किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार जांच के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि प्रशासनिक शक्तियों का किसी स्तर पर दुरुपयोग हुआ है या नहीं और कहीं भ्रष्टाचार से जुड़ी कोई अनियमितता तो नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि भाजपा की मांग है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में हुई नियुक्तियों, सदस्य सचिव से जुड़े प्रशासनिक फैसलों, कंसेंट जारी करने की प्रक्रिया और अपीलीय व्यवस्था की विस्तृत जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

राकेश जमवाल ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार पारदर्शिता और सुशासन के दावे करती है। ऐसे में यदि इस तरह के गंभीर आरोप सामने आए हैं तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह तथ्यों को सार्वजनिक करे और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रशासनिक पारदर्शिता और प्रदेश के हितों से जुड़े ऐसे मुद्दों को आगे भी उठाती रहेगी।

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