भाजपा ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को किया नमन्, राष्ट्रीय एकता व असम के लिए योगदान को किया याद
- DSS Admin
- Jun 23, 2026
गुवाहाटी, 23 जून (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी, असम प्रदेश ने मंगलवार को बलिदान दिवस के अवसर पर देश के प्रखर राष्ट्रवादी नेता और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। पार्टी की प्रवक्ता मीता नाथ बोरा ने जारी बयान में कहा कि 23 जून 1953 को जम्मू-कश्मीर में हिरासत के दौरान उनका निधन हुआ था और उनका बलिदान स्वतंत्र भारत के राजनीतिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक माना जाता है।
उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि भारत की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक शक्ति के प्रबल समर्थक थे। देश के विभाजन के बाद उन्होंने उन सभी व्यवस्थाओं का विरोध किया, जिन्हें वे राष्ट्रीय एकता के लिए चुनौती मानते थे। उनका प्रसिद्ध नारा—“एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे”—राष्ट्रीय एकता के प्रति उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक बना।
मीता नाथ बोरा ने बताया कि डॉ. मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर में लागू विशेष संवैधानिक व्यवस्थाओं और परमिट प्रणाली का विरोध किया था। इसी विरोध के तहत वे 1953 में जम्मू-कश्मीर गए, जहां उन्हें हिरासत में लिया गया और बाद में श्रीनगर में उनका निधन हो गया। उनके निधन की परिस्थितियों को लेकर समय-समय पर प्रश्न उठते रहे हैं तथा उनकी माता जोगमाया देवी ने भी इसकी विस्तृत जांच की मांग की थी।
उन्होंने कहा कि असम के लिए डॉ. मुखर्जी का योगदान विशेष महत्व रखता है। विभाजन के समय असम और पूर्वोत्तर भारत का भविष्य अनिश्चित था। उस दौर में लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर डॉ. मुखर्जी का समर्थन और हस्तक्षेप मिला, जिसने असम को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसलिए असम की जनता उन्हें केवल राष्ट्रीय नेता के रूप में नहीं, बल्कि राज्य के हितैषी और संरक्षक के रूप में भी याद करती है।
बोरा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने असमिया भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं सम्मान को भी महत्व दिया। कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति रहते हुए उन्होंने आधुनिक भारतीय भाषाओं के अध्ययन में असमिया भाषा को शामिल करने की पहल की, जिससे असमिया भाषा को शैक्षणिक स्तर पर नई पहचान मिली।
उन्होंने कहा कि आज जब असम विकास, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है, तब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को कृतज्ञता के साथ स्मरण करना आवश्यक है। बलिदान दिवस हमें यह याद दिलाता है कि राष्ट्रीय एकता साहस, त्याग और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले नेताओं के संकल्प से मजबूत होती है।
इस अवसर पर भाजपा असम प्रदेश ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आदर्शों—एक भारत, एक संविधान, एक राष्ट्रीय ध्वज और साझा राष्ट्रीय भविष्य—के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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