फर्जी मैट्रिमोनियल के जरिए देशभर में करोड़ों की ठगी करने वाले कॉल सेंटर का भंडाफोड़; तीन गिरफ्तार

कानपुर 07 जलाई (हि.स.)। कल्याणपुर थाना पुलिस और साइबर सेल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए फर्जी मैट्रिमोनियल वेबसाइट की आड़ में लोगों को शादी का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह का मंगलवार को पर्दाफाश किया है। गिरोह का संचालन करने वाली एक युवती समेत तीन आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं। ये गिरोह पिछले करीब डेढ़ साल से सक्रिय होकर देशभर के 10 से 15 हजार से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है।

पुलिस उपायुक्त पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने मंगलवार को बताया कि एनसीआरपी पोर्टल पर मिली शिकायतों के आधार पर पुलिस ने कल्याणपुर स्थित आवास विकास क्षेत्र के एक फ्लैट पर छापा मारा। यहां से ऑनलाइन मैच प्वाइंट नाम से फर्जी मैट्रिमोनियल कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। इसी कॉल सेंटर से कानपुर ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों और अन्य राज्यों के लोगों से संपर्क कर उन्हें ठगा जा रहा था।

पुलिस ने मौके से सरगना अनुराधा त्रिवेदी, विक्रम खुटे और प्रियंका को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि कॉल सेंटर में करीब 15 युवतियां काम करती थीं। इन युवतियों को प्रतिदिन 100 से 150 लोगों के मोबाइल नंबर दिए जाते थे। वे खुद को मैट्रिमोनियल वेबसाइट की प्रतिनिधि बताकर संपर्क करतीं, फिर सामने वाले व्यक्ति की पसंद और जरूरत की जानकारी जुटाती थीं।

इसके बाद उनकी मांग के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से आकर्षक युवतियों की तस्वीरें तैयार कर भेजी जाती थीं। पीड़ितों को विश्वास में लेने के लिए कॉल सेंटर में काम करने वाली युवतियां ही खुद को संभावित दुल्हन बताकर लंबी बातचीत करतीं, शादी का भरोसा देतीं और सात जन्म तक साथ निभाने जैसे वादे करती थीं। इसके बाद रजिस्ट्रेशन, प्रोफाइल एक्टिवेशन, बातचीत और मुलाकात के नाम पर अलग-अलग शुल्क वसूले जाते थे।

इसी तरीके से गिरोह रोजाना सैकड़ों लोगों को जाल में फंसाकर लाखों रुपये की ठगी करता था। पुलिस ने कॉल सेंटर में काम करने वाली 15 युवतियों से पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। वहीं, गिरोह में शामिल तीनों मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेजने की कार्रवाई की गई।

पुलिस अब आरोपितों के बैंक खातों, लेन-देन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय लेन-देन की पूरी पड़ताल के बाद ठगी की वास्तविक रकम और पीड़ितों की संख्या का स्पष्ट पता चल सकेगा। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों या किसी बड़े साइबर नेटवर्क से जुड़े हैं या नहीं।

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