मिट्टी की गुल्लकों को नया रूप, बिठूर की माटीकला को मिलेगा नया बाजार
- DSS Admin
- May 18, 2026
कानपुर, 18 मई (हि.स.)। गुल्लक केवल मिट्टी का पात्र नहीं बल्कि बचपन, परिवार और बचत की संस्कृति से जुड़ा भावनात्मक प्रतीक है। आज के समय में बच्चों में बचत की आदत विकसित करने और पारम्परिक माटीकला को नई पहचान दिलाने के लिए मिट्टी की गुल्लकों को आधुनिक डिजाइन और तकनीक के साथ तैयार किया जा रहा है। इससे स्थानीय कारीगरों को रोजगार मिलने के साथ बिठूर की माटीकला को भी नया बाजार मिलेगा। यह बातें सोमवार को जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने कही।
जिला प्रशासन की पहल पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के सहयोग से बिठूर के कुम्हारों द्वारा नई डिजाइन की मिट्टी की गुल्लकें तैयार की जा रही हैं। पारम्परिक गुल्लकों को आधुनिक रंग, डिजाइन और फिनिशिंग के साथ विकसित किया जा रहा है ताकि बच्चों और युवाओं को आकर्षित किया जा सके।
मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिनव जे. जैन ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल गुल्लकों को पुनर्जीवित करना नहीं बल्कि स्थानीय कारीगरों को आधुनिक बाजार और तकनीक से जोड़ना भी है। इसके लिए डिजाइन, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर विशेष काम किया जा रहा है।
आईआईटी कानपुर के रंजीत सिंह रोजी शिक्षा केन्द्र प्रोजेक्ट के तहत कारीगरों को तकनीकी सहयोग दिया जा रहा है। परियोजना की कॉर्डिनेटर रीता सिंह ने बताया कि पारम्परिक उत्पादों को आधुनिक जरूरतों के अनुसार विकसित कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिलाई जा सकती है।
प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर शिखा तिवारी ने बताया कि कारीगरों को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं सिरामिक डिजाइनर शैली संगल बच्चों की पसंद को ध्यान में रखते हुए कार्टून, पशु-पक्षी और पारम्परिक आकृतियों वाली नई डिजाइन तैयार कर रही हैं।
बिठूर के कुम्हार राम रतन ने बताया कि पहले मिट्टी की गुल्लकों की मांग कम हो रही थी, लेकिन नए डिजाइन आने के बाद लोगों की रुचि फिर बढ़ने लगी है।

