कांग्रेस ने सरकार पर लगाया ग्रामीण मजदूरी के आकड़ों में छेड़छाड़ का आरोप
- DSS Admin
- Jun 22, 2026
नई दिल्ली, 22 जून (हि.स.)। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर ग्रामीण मजदूरी के आंकड़ों में छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने दावा किया कि सरकार साल 2024 में किए गए रोजगार की परिभाषा में बदलाव की तरह इस बार भी ग्रामीण मजदूरी के आंकड़ों और इसकी परिभाषा में बदलाव कर रही है ताकि मजदूरी के आकड़ों में उछाल दिखाया जा सके।
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि उन्होंने साल 2024 में भी यह चेताया था कि सरकार ने रिजर्व बैंक के जरिए रोजगार और नौकरी में वृद्धि दिखाने के लिए रोजगार की परिभाषा बदलकर वित्त वर्ष 2017-18 से 16 करोड़ 80 लाख नई नौकरियां दिखाने की कोशिश की थी।
उन्होंने कहा कि सरकार अब वही काम ग्रामीण मजदूरी के साथ करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने लगातार चेताया है कि देश की आर्थिक मंदी का कारण मजदूरी में ठहराव है। इसकी वजह से ही लोगों के उपभोग की दर कमजोर हुई और निजी निवेश रुक गया। इसी तथ्य को छिपाने के लिए सरकार ग्रामीण मजदूरी के आकडों और परिभाषा के साथ छेड़छाड़ कर रही है। अभी हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक सालाना ग्रामीण मजदूरी विकास दर लगभग 6 फीसदी से बढ़कर 17- 18 फीसदी हो गई। इसमें एक महीने में ही औसत रोजाना मजदूरी दर में 12.7 फीसदी की बढ़ोतरी दिखाई गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीण मजदूरी में यह उछाल सिस्टमेटिक तरीके से आया। उन्होंने कहा कि लेबर ब्यूरो ने बिना किसी प्रेस रिलीज या वेबसाइट पर जानकारी दिए उत्तर-पूर्व के राज्यों, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और गोवा के कामगारों को सैंपल पूल में शामिल कर लिया। भारत के कामगारों का केवल लगभग 1.2 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद नए डेटा पॉइंट्स कुल सैंपल का लगभग 11 प्रतिशत हैं। इन इलाकों में औसत सैलरी पुराने सैंपल से लगभग 50–55 प्रतिशत अधिक है क्योंकि यहां खेती‑बाड़ी का रोज़गार कम और उच्च कौशल वाले वर्कर्स अधिक हैं।
रमेश ने दावा किया कि असली सैलरी ग्रोथ लगभग 4.3 प्रतिशत सालाना है, जो पिछले चार वर्षों में सबसे कम है। उन्होंने इसे डाटा के साथ छेड़छाड़ बताया।
उल्लेखनीय है कि मुंबई स्थित सिस्टमैटिक्स रिसर्च की जून की रिपोर्ट में जुलाई 2025 से ग्रामीण भारत में मजदूरी वृद्धि में एक संरचनात्मक बदलाव को इंगित किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सालाना ग्रामीण मजदूरी ग्रोथ लगभग 6 फीसदी से बढ़कर 17 फीसदी तक पहुंच गई है। कुछ महीनों में औसत दैनिक मजदूरी में तेज उछाल दर्ज किया गया, जो मजबूत कृषि गतिविधि, निर्माण कार्यों और गैर-कृषि रोजगार की बढ़ती मांग के कारण हुआ है।
-----------

