1100 वर्ष पुरानी प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा से नई राज्यास बना आस्था का महातीर्थ

नई राज्यास बना जैन श्रद्धा का महातीर्थ 1100 साल बाद फिर जागी आस्था की दिव्य ज्योति गुलाबी पाषाण की अद्भुत नक्काशी देख श्रद्धालु मंत्रमुग्ध

भीलवाड़ा, 17 मई (हि.स.)। शाहपुरा के निकटवर्ती नई राज्यास गांव इन दिनों भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक उल्लास के रंग में सराबोर है। 1100 वर्षों तक भूगर्भ में विराजित रहीं प्राचीन दिगम्बर जैन प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर आयोजित दो दिवसीय धार्मिक महोत्सव रविवार को धार्मिक वैभव और उत्साह के साथ प्रारंभ हुआ। गांव की गलियों से लेकर भव्य जिनालय तक “जय जिनेंद्र” के जयघोष गूंजते रहे और पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आया।

विशाल शोभायात्रा, बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों, धर्मध्वजाओं और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में मंगल गीत गाती दिखाई दीं, वहीं युवा और बच्चे भगवान महावीर स्वामी के जयकारों के साथ शोभायात्रा में शामिल हुए। आयोजन में जैन समाज के साथ अन्य समाजों के लोगों की भागीदारी ने सामाजिक समरसता का संदेश भी दिया।

करीब दो करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह भव्य दिगम्बर जैन जिनालय अब क्षेत्र की नई पहचान बनता दिखाई दे रहा है। वियतनाम के सफेद पत्थरों और बंसी पहाड़पुर के गुलाबी पाषाण से निर्मित मंदिर की अद्भुत नक्काशी, विशाल शिखर और दिव्य स्थापत्य श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। विद्युत सजावट से आलोकित मंदिर की स्वर्णिम आभा दूर-दूर तक आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव करा रही है।

महोत्सव का शुभारंभ मज्जिनेंद्र जिन बिम्ब वेदी प्रतिष्ठा, ध्वजारोहण, कलशारोहण और विश्व शांति महायज्ञ के साथ हुआ। मंदिर में विराजित रक्षक देव मंशापूर्ण मानभद्र को नैवेद्य अर्पित कर विश्व शांति, समाज की खुशहाली और मानव कल्याण की कामना की गई। सोमवार को शुभ मुहूर्त में मुख्य प्रतिष्ठा कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। यह आयोजन प.पू. निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव सुधासागर जी महाराज के आशीर्वाद तथा प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश के सानिध्य में आयोजित हो रहा है। समारोह में मसूदा विधायक वीरेंद्र सिंह कानावत तथा आरके मार्बल ग्रुप के चेयरमैन अशोक पाटनी की विशेष उपस्थिति रही।

मंदिर संरक्षक रतनलाल गोधा, अध्यक्ष भागचंद गोधा, राजकुमार गोधा, कमल गोधा और शशि गोधा ने बताया कि यह जिनालय केवल मंदिर नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रेरणास्थल बनेगा। महोत्सव के पीछे की कहानी भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। गोधा परिवार के कमल और राजकुमार गोधा ने बताया कि वर्ष 2001 में धनोप क्षेत्र में नदी की सामान्य खुदाई के दौरान भगवान आदिनाथ, पारसनाथ भगवान और नंदीश्वर द्वीप की लगभग 1100 वर्ष पुरानी दिगम्बर जैन प्रतिमाएं प्राप्त हुई थीं। बाद में इन प्रतिमाओं को श्रद्धाभाव के साथ नई राज्यास लाकर 23 मई 2001 को एक छोटे मंदिर में प्रतिष्ठित किया गया। समय के साथ मंदिर जीर्ण-शीर्ण होने पर भव्य जिनालय निर्माण का संकल्प लिया गया। 5 फरवरी 2022 को मुनि पुंगव सुधासागर महाराज के सानिध्य में मंदिर की नींव रखी गई थी।

मंदिर के गर्भगृह को विशेष स्वर्ण आभा से सजाया गया है, जहां भगवान महावीर स्वामी की मुख्य वेदी के साथ भगवान आदिनाथ, पारसनाथ भगवान, नंदीश्वर द्वीप, मुनि सुदृढ़नाथ सहित नौ देवताओं की धातु एवं पाषाण निर्मित प्रतिमाएं विराजमान होंगी। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि आने वाले समय में यह जिनालय क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक तीर्थ के रूप में स्थापित होगा। पूरे गांव को रंग-बिरंगी झांकियों, विद्युत सजावट और धर्मध्वजाओं से सजाया गया है। महोत्सव के दौरान विशाल वात्सल्य भोज और सामूहिक प्रसादी का आयोजन भी किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में समाजजन, महिलाएं और विभिन्न धार्मिक क्षेत्रों से जुड़े श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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