वेद मार्ग पर चलकर मन को करें वश में, तभी मिलेगा सुख-शांति-स्वामी राम स्वरूप जी

Control your mind by following the path of Vedas, only then will you find happiness and peace - Swami Ram Swaroop Ji


कठुआ, 14 मई । वेद मन्दिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 33वें दिन स्वामी राम स्वरूप योगाचार्य ने श्रद्धालुओं को वेद ज्ञान का गूढ़ संदेश देते हुए मन को नियंत्रित करने और वेद मार्ग पर चलने का महत्व बताया।

उन्होंने ऋग्वेद मंत्र 10/20/1 “भद्रम् नो अपि वातय मनः” का अर्थ समझाते हुए कहा कि मन को कल्याण के मार्ग पर चलाना ही सच्ची उपासना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल प्रार्थना करने से ईश्वर प्रसन्न नहीं होते बल्कि प्रार्थना के अनुरूप शुभ कर्म करना भी आवश्यक है। स्वामी जी ने अथर्ववेद के मंत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि मन के द्वारा वेद मंत्रों का चिंतन, शुद्ध बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति तथा अग्निहोत्र यज्ञ के माध्यम से परमात्मा की उपासना करने से मन पवित्र होता है और बुरे विचारों से दूर रहता है। उन्होंने क्रोध, कटु वचन और पाप विचारों का त्याग कर सदैव शुभ कर्म करने का संदेश दिया।

उन्होंने आगे बताया कि यजुर्वेद अध्याय 34 के मंत्रों का नियमित अध्ययन और आहुति देने से मन पाप प्रवृत्तियों से हटकर धर्म के मार्ग पर अग्रसर होता है। स्वामी जी ने कहा कि नित्य यज्ञ, योगाभ्यास और विद्वानों से वेद ज्ञान प्राप्त करना ही जीवन में सुख-शांति, धन-सम्पदा और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग है। अंत में उन्होंने लोकवाणी के प्रसिद्ध कथन “मन जीते जग जीत” का उल्लेख करते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपने मन और इन्द्रियों को वश में कर लेता है, वही सच्चे अर्थों में जीवन में सफलता और शांति प्राप्त करता है।

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