जिलाधिकारी ने हिंदी में ड्रोन तकनीक पर पुस्तक लिखने वाले सुबोध दीक्षित को किया सम्मानित

सेना के बाद भी नहीं टूटा देश सेवा का जज्बा, राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत को समर्पित पुस्तक बनी जनजागरूकता का माध्यम

अमेठी, 13 मई (हि.स.)। देश सेवा केवल वर्दी तक सीमित नहीं होती, बल्कि राष्ट्रहित के लिए निरंतर समर्पण ही सच्ची देशभक्ति का परिचायक होती है। इसी भावना को चरितार्थ कर रहे हैं अमेठी में स्थित इंडो रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के उप महाप्रबंधक (डीजीएम) एवं मुख्य सुरक्षा अधिकारी, सेवानिवृत्त स्क्वाड्रन लीडर सुबोध दीक्षित, जिन्होंने भारतीय वायु सेना में वर्षों तक उत्कृष्ट सेवाएं देने के बाद अब समाज, प्रशासन और राष्ट्रहित के मुद्दों पर अपनी लेखनी एवं शोध कार्यों के माध्यम से योगदान देना जारी रखा है।

स्क्वाड्रन लीडर रहे सुबोध दीक्षित ने हिंदी भाषा में “ड्रोन तकनीक राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत” शीर्षक पुस्तक लिखकर एक नया इतिहास रच दिया है। यह पुस्तक न केवल ड्रोन तकनीक को सरल हिंदी भाषा में आमजन तक पहुंचाती है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वरोजगार, तकनीकी आत्मनिर्भरता और युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार भी खोलती है। हिंदी जैसी सरल भाषा में इस जटिल विषय को प्रस्तुत करना उनकी दूरदर्शिता और समाज के प्रति संवेदनशील सोच को दर्शाता है। आज उन्होंने अपनी पुस्तक जिलाधिकारी संजय चौहान को भेंट किया। जिस पर जिलाधिकारी ने उनकी सराहना करते हुए इसे समाजोपयोगी एवं युवाओं के लिए प्रेरणादायी प्रयास बताया।

जिलाधिकारी ने कहा कि जिस प्रकार स्क्वाड्रन लीडर सुबोध दीक्षित अपने सैन्य अनुभवों को समाजहित और जनजागरूकता के कार्यों में परिवर्तित कर रहे हैं, वह वास्तव में अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि तकनीकी विषयों को सरल हिंदी भाषा में उपलब्ध कराना एक बड़ा सामाजिक योगदान है, जिससे ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवा भी नई तकनीकों की जानकारी प्राप्त कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।

सुबोध दीक्षित द्वारा लिखित यह पुस्तक केवल तकनीकी जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों, छात्रों, युवाओं, किसानों, सुरक्षा एजेंसियों और स्वरोजगार की तलाश कर रहे लोगों के लिए भी उपयोगी मार्गदर्शिका का कार्य करेगी। पुस्तक में ड्रोन तकनीक के उपयोग, सुरक्षा पहलुओं, भविष्य की संभावनाओं, रोजगार के अवसरों तथा राष्ट्रीय सुरक्षा में इसकी भूमिका को सहज एवं व्यावहारिक तरीके से समझाया गया है। विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं के लिए यह पुस्तक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि ड्रोन तकनीक आज कृषि, सर्वेक्षण, सुरक्षा, निगरानी, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक क्षेत्रों में तेजी से उपयोग की जा रही है।

ऐसे में इस विषय की जानकारी हिंदी में उपलब्ध होने से युवा नए रोजगार अवसरों की ओर अग्रसर हो सकेंगे। पुस्तक गरीब एवं सामान्य वर्ग के उन युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत है जो संसाधनों के अभाव में तकनीकी शिक्षा से दूर रह जाते हैं।

सुबोध उन चुनिंदा लेखकों एवं शोधकर्ताओं में शामिल हैं जो राष्ट्रीय समस्याओं की जड़ों को समझते हुए उनके समाधान के लिए शोध आधारित परियोजनाओं पर कार्य करते हैं। प्रशासनिक कार्य, सैनिक एवं नागरिक एयर ट्रैफिक कंट्रोल, रडार संचालन, यूएवी (ड्रोन) फ्लाइंग, सुरक्षा प्रबंधन तथा रक्षा क्षेत्र के विविध अनुभवों ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान प्रदान की है। वे वर्तमान में अमेठी स्थित इंडो रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड में महत्वपूर्ण दायित्व निभाने के साथ-साथ देश और प्रदेश के विकास से जुड़े विषयों पर शोधरत हैं। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश को अधिक विकसित एवं आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से वे अपने स्वतंत्र प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहे हैं।

उनकी विशेषज्ञता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारतीय वायु सेना ने मिग-21 लड़ाकू विमान की अंतिम उड़ान कार्यक्रम के दौरान उनके अनुभव और दक्षता को देखते हुए सेवानिवृत्ति के बाद भी विशेष रूप से आमंत्रित किया। सितंबर 2025 में आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपना भारतीय वायु सेना द्वारा उन पर व्यक्त विश्वास का प्रमाण है।

स्क्वाड्रन लीडर रहे अड़तीस वर्षीय सुबोध दीक्षित अब तक सात से अधिक पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। वे हिंदी के अच्छे कवि, लेखक, हिंदी-अंग्रेजी अनुवादक और प्रभावशाली वक्ता भी हैं। हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, राजनीति शास्त्र, मानव संसाधन, मीडिया प्रबंधन, एविएशन, ड्रोन तकनीक, रडार तकनीक तथा वैदिक यज्ञ जैसे विविध विषयों में उनकी गहरी समझ उन्हें बहुआयामी व्यक्तित्व प्रदान करती है। वे समाज सेवा एवं राष्ट्रहित से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। अमेठी में ड्रोन से संबंधित फैली अफवाहों के दौरान प्रशासन की सहायता कर उन्होंने जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय दिया, जिसके लिए उन्हें पूर्व में जिलाधिकारी एवं पुलिस प्रशासन द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है।

सुबोध दीक्षित की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि सच्चा समर्पण और ईमानदारी कभी व्यर्थ नहीं जाती। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने राष्ट्रसेवा की भावना को जीवित रखते हुए समाज और देशहित के लिए अपनी विशेषज्ञता को नई दिशा दी है।

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