खाद्य सुरक्षा से किसान समृद्धि की ओर बढ़नी चाहिए भारत की कृषि व्यवस्था : डॉ. परोदा
- DSS Admin
- Jun 05, 2026
नई दिल्ली, 05 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (एनएएएस) के स्थापना दिवस समारोह में शुक्रवार को डॉ. एमएस स्वामीनाथन फाउंडेशन डे व्याख्यान में ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (टीएएएस) के अध्यक्ष डॉ. आरएस परोदा ने कहा कि भारत ने खाद्य सुरक्षा हासिल कर ली है और अब कृषि विकास का केंद्र ‘फार्मर फर्स्ट’ दृष्टिकोण के साथ किसानों की समृद्धि होना चाहिए।
भारत रत्न एम एस स्वामीनाथन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए डॉ. परोदा ने कहा कि हरित, श्वेत, नीली और इंद्रधनुषी क्रांतियों के माध्यम से देश ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की है। अब अगला लक्ष्य किसानों की आय और जीवन स्तर में सुधार होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में भारत ने 376 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 19 मिलियन टन अधिक है। इस दौरान चावल का उत्पादन 154 मिलियन टन, गेहूं 120 मिलियन टन, मक्का 55 मिलियन टन और तिलहन उत्पादन 43 मिलियन टन से अधिक रहा।
डॉ. परोदा ने कृषि क्षेत्र की चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाते हुए कहा कि घटती कृषि लाभप्रदता, भूमि जोत का लगातार छोटा होना, मृदा क्षरण, भूजल दोहन, जलवायु परिवर्तन के खतरे, कुपोषण और युवाओं की खेती में घटती रुचि जैसी समस्याओं का समाधान जरूरी है।
उन्होंने प्रो. स्वामीनाथन की ‘एवरग्रीन रिवोल्यूशन’ अवधारणा का उल्लेख करते हुए पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया।
डॉ. परोदा ने भारतीय कृषि के पुनर्निर्माण के लिए पांच प्रमुख स्तंभ सुझाए—आय-केंद्रित नीतियां, जलवायु-स्मार्ट कृषि, समावेशी प्रौद्योगिकी, पोषण सुरक्षा तथा महिलाओं एवं युवाओं का नेतृत्व।
उन्होंने बताया कि 10,000 किसान उत्पादक संगठनों के गठन का लक्ष्य पहले ही पूरा हो चुका है और इसे बढ़ाकर 20,000 कर दिया गया है। वर्तमान में लगभग 56 लाख किसान एफपीओ से जुड़े हैं, जिनमें 22 लाख महिला किसान शामिल हैं। साथ ही 1,175 महिला-केवल एफपीओ भी कार्यरत हैं।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में पांच वर्ष से कम आयु के 35.5 प्रतिशत बच्चे अवरुद्ध वृद्धि (स्टंटिंग) से प्रभावित हैं। उन्होंने मोटे अनाज, दलहन, सोयाबीन, जैव-संवर्धित फसलों, फलों और सब्जियों के उत्पादन एवं उपभोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
डॉ. परोदा ने कहा कि संस्थागत सुधार, मजबूत कृषि विस्तार प्रणाली तथा सार्वजनिक संस्थानों, निजी क्षेत्र और किसान संगठनों के बीच बेहतर सहयोग समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक प्रगति का आकलन इस बात से होगा कि देश का किसान सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि के साथ जीवन यापन कर पा रहा है या नहीं।
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