दिल्ली में नृत्य उत्सव में 100 से अधिक नर्तकों ने भरतनाट्यम की परंपरा को किया जीवंत
- DSS Admin
- Jun 05, 2026
नई दिल्ली, 05 जून (हि.स.)।भरतनाट्यम संस्था आयाम ने दिल्ली स्थित एलटीजी ऑडिटोरियम में शुक्रवार को अपने वार्षिक नृत्य उत्सव ‘नृत्यधारा 3’ का भव्य आयोजन किया।
इस प्रस्तुति में 100 से अधिक नर्तकों ने भाग लेकर भरतनाट्यम की समृद्ध परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा और वर्षों की साधना को मंच पर साकार किया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना एवीएम4 राज्यसभा की पूर्व सदस्य सोनल मानसिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
गुरु सिंधु मिश्रा की परिकल्पना और निर्देशन में प्रस्तुत ‘नृत्यधारा 3’ में भरतनाट्यम की गुरु के. एन. दंडायुधपाणि पिल्लई शैली (बानी) की झलक देखने को मिली। यह परंपरा अपनी जटिल लयकारी, आकर्षक मंचीय संरचना और भावपूर्ण अभिव्यक्ति के लिए जानी जाती है। गुरु सिंधु मिश्रा को यह विरासत उनके गुरु श्री के. एन. दक्षिणामूर्ति से प्राप्त हुई, जिसे वे पिछले दो दशकों से आयाम के माध्यम से आगे बढ़ा रही हैं।
इस अवसर पर गुरु सिंधु मिश्रा ने कहा, “नृत्यधारा केवल एक मंचीय प्रस्तुति नहीं बल्कि सीखने की पूरी प्रक्रिया का प्रतिबिंब है। जब 100 से अधिक विद्यार्थी, जो अपनी-अपनी साधना के अलग-अलग पड़ावों पर हैं, एक मंच पर आते हैं, तो वहां केवल तकनीक नहीं बल्कि समर्पण, अनुशासन और परंपरा की जीवंत निरंतरता दिखाई देती है। गुरु के. एन. दंडायुधपाणि पिल्लई की बानी पीढ़ियों की साधना का परिणाम है। इसे आगे बढ़ाना हमारा सौभाग्य और दायित्व दोनों है।”
कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ शिष्याओं अपूर्वा भटनागर, साक्षी गुप्ता और विभूति भारद्वाज द्वारा प्रस्तुत कृति ‘आनंद नर्तन गणपतिम भावये’ से हुई। इस प्रस्तुति ने भक्ति और कलात्मक ऊर्जा से भरा वातावरण निर्मित किया। इसके बाद आयाम के नन्हे कलाकारों ने ‘अंगिकम् भुवनम्’ श्लोक प्रस्तुत कर भगवान शिव को नृत्यांजलि अर्पित की। उनकी मासूम अभिव्यक्ति और उत्साह ने दर्शकों का मन मोह लिया।
वरिष्ठ शिष्या अरुंधति चक्रवर्ती ने ‘कृष्णा नी बेगने बारो’ की प्रस्तुति से यशोदा और बाल कृष्ण के वात्सल्य भाव को प्रभावशाली ढंग से मंचित किया। इसके पश्चात जूनियर विद्यार्थियों ने ‘मूषक वाहन’ पुष्पांजलि प्रस्तुत कर भगवान गणेश को नमन किया। नृत्य और अभिनय के संतुलित संयोजन ने उनकी साधना और समर्पण को दर्शाया।
मध्यवर्ती विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत रागमालिका में जटिस्वरम ने कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी। मिश्र चापु ताल में बंधी इस प्रस्तुति में जटिल लय संरचनाओं और आकर्षक कोरवाइयों का सुंदर प्रदर्शन देखने को मिला।
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण वरिष्ठ शिष्या तनुषा त्यागी की प्रस्तुति रही। उन्होंने रामचरितमानस के एक दुर्लभ अंश ‘तन छार व्याल कपाल भूषण’ को मंच पर जीवंत किया। यह प्रसंग भगवान शिव और पार्वती के विवाह से जुड़ा है, जिसमें पार्वती की माता मैना शिव की विचित्र बारात को देखकर विचलित हो जाती हैं और अपनी पुत्री को विवाह से रोकने का प्रयास करती हैं। तनुषा ने इस भावप्रधान रचना को प्रभावशाली अभिनय के साथ प्रस्तुत किया।
इसके बाद वयस्क शुरुआती विद्यार्थियों ने ‘श्री रामचंद्र कृपालु भज मन’ की प्रस्तुति दी।
संध्या का समापन वरिष्ठ विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत परस राग और आदि ताल में रचित थिल्लाना से हुआ। तेज़ पदचालन, सटीक लयकारी और ऊर्जावान प्रस्तुति ने दंडायुधपाणि पिल्लई बानी की विशिष्टताओं को प्रभावशाली रूप से दर्शाया।
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