गीत गाया पत्थरों ने फिल्म से मशहूर हुए साहित्यकार केके नूतन पंचतत्व में विलीन

मंडी, 17 मई (हि.स.)। हिमाचल के मशहूर साहित्यकार एवं हिंदी फिल्म गीत गाया पत्थरों ने से चर्चित हुए कृष्ण कुमार नूतन रविववार को पंचतत्व में विलीन हो गए। शनिवार शाम को लंबी बीमारी के चलते उनका निधन हो गया, वे 97वें साल के थे। 29 नवंबर 1929 को स्वतंत्रता सेनानी खेमचंद के घर जन्में कृष्ण कुमार नूतन का जीवन भी किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं था। परिवार की ओर से अल्पायु में विवाह करवाने के विरोध में घर से भाग निकले और साधू बन गए। भारतीय संस्कृति और धर्मग्रंथों का अध्ययन किया, साहित्य की ओर मुड़ गए। कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक हर विद्या पर कलम चलाई, तो खूब चलाई। बीस से अधिक पुस्तकों की रचना कर डाली, जिनमें उपन्यास अधिक थे।

के .के. नूतन के नाम से मशहूर कृष्ण कुमार नूतन को इतिहास साक्षी है पुस्तक पर हिमाचल प्रदेश सरकार के भाषा संस्कृति विभाग की ओर से डा. यशवंत सिंह परमार राज्य पुरस्कार प्रदान किया गया। के. के. नूतन मंडी के पहले साहित्यकार थे, जिनकी पुस्तकें देश की आजादी के एकदम बाद वर्ष 1948 में तीन पुस्तकें व्याकुल हृदय कविता संग्रह, परिप्रभा कहानी संग्रह और चंद्रहास नाटक प्रकाशित हो चुकी थी। उनकी कहानी यादगार पर अपने समय के मशहूर फिल्म निर्देशक शांताराम ने गीतगाया पत्थरों ने बनाई, मगर लेखक के रूप में उनका नाम नहीं दिया गया। बस यहीं से शुरू हुआ एक ऐसा विवाद, जिसने हिमाचल के गुमनाम से इस लेखक को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलवा दी।

कृष्ण कुमार नूतन गीत गाया पत्थरों फिल्म से देश भर में मशहूर हो गए। यह अभिनेता जितेंद्र की प्रारंभिक फिल्मों में से एक थी।

नूतन साहित्यकार के अलावा क्रांतिकारी कर्मचारी नेता भी रहे हैं। उन्होंने कर्मचारियों के कई आंदोलनों का नेतृत्व भी किया। इतिहास पर उनकी खासी पकड़ थी। अपनी पुस्तक इतिहास साक्षी है में स्वतंत्रता सेनानी रानी खैरगढ़ी, स्वामी कृष्णा नंद और भाई हिरदा राम की जीवनी प्रकाशित किया है। जीवन भर आंतरिक ऊर्जा से भरे कृष्ण कुमार नूतन ने कुछ समय पत्रकारिता में भी गुजारा। उनकी साहित्यिक सेवाओं को देखते हुए हेमकांत मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया।

रविवार को हुनमान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस अवसर पर उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन, साहित्यकार एवं पत्रकार मौजूद रहे। जिनमें वरिष्ठ कवि दीनू कश्यप, उपन्यासकार , गंगाराम राजी, हिमाचल गौरव बीरबल शर्मा ,साहित्यकार मुरारी शर्मा, डा. धर्मपाल कपूर, कृष्णचंद्र महादेविया, डा. राकेश शर्मा, सत्यमहेश शर्मा, पत्रकार खेमचंद शास्त्री,वीरेंद्र भारद्वाज, धर्मवीर, विनोद राणा के अलावा शहर के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

इन्होंने भी जताया शोक

साहित्यकार कृष्ण कुमार नूतन के निधन पर समाज के हर वर्ग ने शोक प्रकट किया है। जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने कहा कि कृष्ण कुमार नूतन को भाषा विभाग की ओर से डा. यशवंत परमार राज्य पुरस्कार प्रदान किया गया था। हाल ही में विभाग द्वारा अस्सी साल से अधिक आयु के साहित्यकारों पर पुस्तक का प्रकाशन किया जा रहा है। जिसमें कृष्ण कुमार नूतन को भी शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा वरिष्ठ साहित्यकार रेखा वशिष्ठ, कवयित्री रूपेश्वरी शर्मा, रंगकर्मी सीमा शर्मा, शायर रविराणा शाहीन, प्रकाशचंद्र धीमान, डा. पीसी कौंडल , हेमकांत कात्यायन मेमोरियल ट्रस्ट की अध्यक्ष निर्मला कातयायन आदि शोक संतप्त परिवार के साथ संवेदना प्रकट की है।

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