गुरुग्राम: पंछियों के लिए दाना-पानी नेस्ट मतलब प्रकृति का संरक्षण: अंकुश मिगलानी

गुरुग्राम स्थित जिला रेडक्रॉस सोसायटी परिसर में दाना-पानी नेस्ट लगाते भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी हरियाणा राज्य शाखा के उपाध्यक्ष अंकुश मिगलानी।


-नवकल्प फाउंडेशन का दाना-पानी नेस्ट अनूठा काम

-रेडक्रॉस उपाध्यक्ष नेस्ट लगाकर दिया पंछियों के संरक्षण का संदेश

गुरुग्राम, 15 जून । भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी हरियाणा राज्य शाखा के उपाध्यक्ष अंकुश मिगलानी ने नवकल्प फाउंडेशन के दाना-पानी नेस्ट अभियान को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि गर्मी में बेजुबान पंछियों के लिए पानी और दाने की व्यवस्था करना मानवता का सबसे बड़ा धर्म है। रेडक्रॉस की ओर से संचालित वर्किंग वूमेन हॉस्टल, ओल्ड एज होम के लिए भी नवकल्प फाउंडेशन ने दाना-पानी नेस्ट भेंट किए।

नवकल्प फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रहे दाना-पानी नेस्ट अभियान के तहत उपाध्यक्ष अंकुश मिगलानी ने भी पंछियों के लिए नेस्ट लगाए। उन्होंने नेस्ट लगाकर इस अभियान की शुरुआत की और लोगों से अपील की कि वे अपने घर, छत और बालकनी में नेस्ट लगाकर पंछियों की मदद करें। अंकुश मिगलानी ने कहा कि नवकल्प फाउंडेशन ने जो काम शुरू किया है, वह समाज के लिए एक मिसाल है। आज जब हम विकास की बात करते हैं तो प्रकृति और जीव-जंतुओं को भूल जाते हैं। लेकिन नवकल्प की टीम ने पंछियों के संरक्षण के लिए जो नेस्ट अभियान चलाया है, वह पर्यावरण और मानवता दोनों की सेवा है। मेरा सभी से अनुरोध है कि वे इस पहल से जुड़ें और अपने घरों में दाना-पानी की व्यवस्था करें। छोटी-छोटी कोशिशें मिलकर बड़ा बदलाव लाती हैं। उन्होंने नवकल्प फाउंडेशन के अध्यक्ष अनिल आर्य, उपाध्यक्ष डॉ. सुनील आर्य और पूरी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समाजसेवा के क्षेत्र में इस तरह के अनूठे काम लोगों को जागरूक करते हैं और नई पीढ़ी को प्रेरणा देते हैं।

जिला रेडक्रॉस सचिव विकास कुमार ने कहा कि रेडक्रॉस इस तरह के सामाजिक और पर्यावरणीय कार्यों में नवकल्प फाउंडेशन के साथ सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग को आगे आकर इस अभियान को जन आंदोलन बनाना चाहिए। नवकल्प फाउंडेशन के अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि हमारा उद्देश्य सिर्फ दाना-पानी रखना नहीं है, बल्कि लोगों में संवेदनशीलता जगाना है। हमारा सपना है कि हर घर में एक नेस्ट हो और कोई भी पंछी प्यासा न रहे। उपाध्यक्ष डॉ. सुनील आर्य ने कहा कि पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में पंछियों की बड़ी भूमिका है। लेकिन शहरीकरण और प्रदूषण के कारण इनकी संख्या लगातार घट रही है। दाना-पानी नेस्ट अभियान के जरिए हम समाज को यह संदेश देना चाहते हैं कि प्रकृति के हर जीव की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। अगर हम आज जागरूक नहीं हुए तो आने वाली पीढिय़ां केवल किताबों में ही चिडिय़ों को देखेंगी।

   

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