मप्र के धार जिले की भोजशाला मामले में हाई कोर्ट में अंतिम सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

- मुस्लिम पक्ष ने सर्वे और मंदिर होने के दावों पर उठाए सवाल

भोपाल/इंदौर, 12 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में बहुचर्चित धार भोजशाला प्रकरण की अंतिम सुनवाई मंगलवार को पूरी हो गई। करीब दो घंटे से अधिक चली बहस के बाद अदालत ने अपना फैसला 'रिजर्व फॉर ऑर्डर' (सुरक्षित) रख लिया है। अब सभी की निगाहें उच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि इस ऐतिहासिक परिसर का धार्मिक स्वरूप और अधिकार किसके पास रहेंगे।

मुस्लिम पक्ष की दलीलें

सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े सलमान खुर्शीद ने कड़े तर्क रखे। एडवोकेट शोभा मेनन ने कहा कि अभी तक यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ है कि यह मंदिर है, मस्जिद है या कोई जैन शाला। उन्होंने तर्क दिया कि यदि यह मंदिर होता, तो वहां मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा के प्रमाण मिलते, जो कि अनुपलब्ध हैं। मुस्लिम पक्ष ने दलील दी कि किसी स्थल का धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट के पास है, न कि रिट याचिका (अनुच्छेद 226) के तहत उच्च न्यायालय के पास।

सर्वे रिपोर्ट पर उठाए गए गंभीर सवाल

एडवोकेट सलमान खुर्शीद और तौसिफ वारसी ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की 98 दिनों की सर्वे रिपोर्ट को कटघरे में खड़ा किया। खुर्शीद ने दावा किया कि सर्वे के दौरान गौतम बुद्ध की प्रतिमा मिली थी, लेकिन एएसआई की रिपोर्ट में इसका उल्लेख नहीं किया गया। साथ ही, कार्बन डेटिंग तकनीक का इस्तेमाल न करने पर भी आपत्ति जताई गई। मुस्लिम पक्ष ने आरोप लगाया कि उन्हें सर्वे की औपचारिक सूचना नहीं दी गई। साथ ही, आधुनिक तकनीक के बजाय पुरानी 'टोटल स्टेशन' विधि के उपयोग और वीडियोग्राफी की स्पष्टता पर भी सवाल उठाए।

हिंदू पक्ष और एएसआई का रुख

याचिकाकर्ता रंजना अग्निहोत्री और हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन व विनय जोशी पहले ही अपने तर्क रख चुके हैं। उन्होंने 98 दिनों के वैज्ञानिक सर्वे और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर भोजशाला को वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर बताते हुए पूर्ण अधिकार की मांग की है। एएसआई ने भी कोर्ट में अपनी सर्वे रिपोर्ट का बचाव करते हुए उसे मजबूती से प्रस्तुत किया है।

गौरतलब है कि यह विवाद 2022 में दायर एक याचिका के बाद दोबारा चर्चा में आया था। वर्ष 2024 में एएसआई ने अदालत के आदेश पर परिसर का व्यापक वैज्ञानिक सर्वे किया था। इससे पहले, 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी के अवसर पर उच्चतम न्यायालय ने परिसर में पूरे दिन पूजा-अर्चना की विशेष अनुमति दी थी। फिलहाल, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अब उच्च न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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