एनएसडी में 'फॉरेन इनपुट प्रोग्राम' का भव्य उद्घाटन, भारत-रूस के सांस्कृतिक संबंध होंगे और मजबूत
- DSS Admin
- Jun 18, 2026
नई दिल्ली, 18 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में गुरुवार को तीन वर्षीय डिप्लोमा कोर्स के छात्रों के लिए विशेष 'फॉरेन इनपुट प्रोग्राम' का उद्घाटन किया गया। इससे भारत-रूस के बीच सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे।
एनएसडी के अनुसार इस विशेष उद्घाटन समारोह का शुभारंभ नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में भारत में रूसी राजदूत की पत्नी मैडम डायना अलीपोवा और भारत में रूसी संघ के दूतावास की काउंसलर (संस्कृति) यूलिया आर्यवा और कलाकार सहित अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
एनएसडी और एमॉस्को के रशियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ थिएटर आर्ट्स (जीआईटीआईएस) के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम के पहले दिन दो बेहतरीन नाटकों का मंचन किया गया। इसमें लेखिका एलेना इसाएवा द्वारा लिखित और नतालिया शुर्गानोवा द्वारा निर्देशित नाटक 'द कोर्टयार्ड एज ए वैनिशिंग स्पीशीज़' और अलेक्जेंडर ओस्ट्रोव्स्की की मशहूर रचना 'ग्रोज़ा' (द थंडरस्टॉर्म) का हिंदी रूपांतरण ' द स्टॉर्म'
शामिल थे। यह नाटक अलेक्जेंडर खुखलिन द्वारा निर्देशित है। इस नाटक का अनुवाद एनएसडी के पूर्व छात्र एवं कलाकार अमिताभ श्रीवास्तव ने किया है।
वोल्गा नदी के किनारे बसे काल्पनिक शहर 'कालिनोव' पर आधारित ' द स्टॉर्म' नाटक कैटेरिना की कहानी है। कैटेरिना एक संवेदनशील और गहरी आध्यात्मिक सोच वाली युवा महिला है जो पितृसत्तात्मक समाज की सख्त बंदिशों में फंसी हुई है। अपनी सास कबानिखा के दमनकारी शासन और एक नाखुश शादी में बंधी कैटेरिना आज़ादी और प्यार की चाहत रखती है। उसकी भावनात्मक यात्रा व्यक्तिगत इच्छा, नैतिकता, सामाजिक रीति-रिवाजों और व्यक्तिगत आज़ादी की खोज की एक सशक्त पड़ताल बन जाती है।
'फॉरेन इनपुट प्रोग्राम' का मुख्य उद्देश्य एनएसडी के अंतिम वर्ष के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के रंगमंच कलाकारों के साथ काम करने का व्यावहारिक अनुभव देना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्र वैश्विक थिएटर परंपराओं, विभिन्न रचनात्मक तरीकों और अभिनय की बारीकियों को करीब से जान और समझ सकेंगे।
रंगमंच विशेषज्ञों का मानना है कि जीआईटीआईएस इंटरनेशनल और एनएसडी का यह साझा प्रयास भारत-रूस के बीच कला, संस्कृति और सीखने-सिखाने के पारंपरिक आदान-प्रदान को एक नए स्तर पर ले जाएगा तथा दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।
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