
डेहरी आन सोन, 01 अप्रैल (हि.स.)। बिहार में रोहतास जिले के बिक्रमगंज के द डीपीएस में आज आयोजित भारतीय नववर्ष उत्सव में बतौर मुख्य अतिथि बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां ने लोगों को भारतीय नववर्ष और चैती छठ की शुभकामना दी। मौके पर उन्होंने कहा कि नववर्ष पर अपना नवीनीकरण करें।
राज्यपाल आरिफ खान ने कहा कि बिहार के लोग बिहार के बाहर सिर्फ और सिर्फ बिहारी होते हैं, इसलिए किसी भी राज्य में केंद्रीय परीक्षाओं में कामयाबी मिलती है। बिहार के अंदर ढूंढे से बिहारी नहीं है। इसलिए स्वयं को पहचानिए।नित्य नूतन, चित पुरातन यानी नित्य नए बनिए, नया ऊर्जा के साथ काम कीजिए।
राज्यपाल ने कहा कि गंगा नदी में गंदगी डाली जाती है, लेकिन कुछ दूर चलने के बाद गंगा स्वयं शुद्धिकरण की प्रक्रिया हो जाती है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में अपने नवीनीकरण की अद्भुत क्षमता है। हम ज्ञान की संस्कृति और कर्म की संकल्पना को मानते हैं। पतन के काल से गुजरे हैं, जहां हम खुद अपने किस्मत के मालिक नहीं थे। लेकिन आज हम पूरी ताकत से खड़े हैं, यह हमारे अंदर की ताकत और क्षमता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संकल्प 2047 तक विकसित भारत की चर्चा करते हुए कहा कि उस समय आजादी के सौ साल पूरे होंगे तो गुलामी के सभी दाग मिट जाएंगे। पीएम ने कहा है कि भारत की ज्ञान, संस्कृति को दुबारा स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि टुकड़े में बंटा समाज न विकास कर सकता है न ख्याति प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने कहा कि सभी प्राणी स्वयं में और परमात्मा में ही विद्यमान हैं, जिससे उसे मोह और भ्रम से मुक्ति मिल जाएगी। राज्यपाल ने कई श्लोक और पद भी पढ़े और भारतीय संस्कृति से अवगत कराया।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति मेरी आस्था है। करुणा का भाव असीमित होता है। राजनीति का अर्थ जिनसे स्नेह, दया, प्यार है, जो मेरे लिए सुख के साधन हैं, जिनकी सेवा के लिए प्रण किया है, उनकी सेवा करना। सेवा का काम ही पूजा है और मानव सेवा ही माधव सेवा है।
इस समारोह के मुख्य वक्ता आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने संबोधित करते हुए कहा कि आज ही के दिन पृथ्वी ब्रह्मांड में स्थापित हुई थी, इसी दिन पृथ्वी पर पहला मनुष्य प्रतिष्ठित हुए थे। पृथ्वी संवत और सृष्टि संवत का दिन है।
उन्होंने कहा कि कहा मनुष्य क्रोध, घृणा, अपशब्द, तृष्णा के कारण हिंसक हो जाता है। इन सब को छोड़ने का संकल्प लीजिए। जो इन अविद्या का त्याग कर देते हैं, लोग उसकी पूजा करते हैं। इसलिए हमेशा प्रेमपूर्वक रहिए और मुस्कुराते रहिए। उन्होंने कहा कि प्रभु राम ने कभी विस्तार वादी नीति नहीं अपनाया। उनमें कोई अविद्या नहीं थी, जिसके कारण मर्यादा पुरुषोत्तम बने।
मुख्य अतिथि जैन मुनि आचार्य लोकेश जी ने अनेकता में एकता को यहां कि मौलिक विशेषता बताया। समारोह को विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने भी संबोधित किया। इससे पूर्व घरवासडीह मठ के पंचम पीठाधीश्वर नारायणाचार्य स्वामी जी का आशीर्वचन हुआ।
इस अवसर पर राजेश्वर राज व अखिलेश कुमार ने राज्यपाल सहित सभी अतिथियों का स्वागत शाल, फूलमाला और तुलसी का पौधा देकर किया।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / उपेन्द्र मिश्रा