नेपाल के रास्ते भारत और चीन को जोड़ने वाला राजमार्ग सेना ने सड़क विभाग को सौंपा
- DSS Admin
- May 12, 2026
काठमांडू, 12 मई (हि.स.)। भारत–नेपाल–चीन को जोड़ने वाले उत्तर–दक्षिण कोशी राजमार्ग के अंतर्गत सबसे चुनौतीपूर्ण माने जाने वाले च्याम्ताङ–घोङ्गप्पा 10.81 किलोमीटर सड़क खंड का निर्माण कार्य पूरा कर नेपाली सेना ने इसे सड़क विभाग को हस्तांतरित कर दिया है।
कठिन चट्टानों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ट्रैक खोलना मुश्किल माने जाने वाले इस खंड के निर्माण और स्तरोन्नति कार्य पूरा होने के बाद सेना ने इसे कोशी सड़क आयोजना को सौंप दिया।
नेपाली सेना के प्रमुख सेनानी शेरबहादुर सिंह ने सोमवार को यह सड़क हस्तांतरण किया। यह सड़क भारत के जोगबनी से विराटनगर होते हुए किमाथाङ्का तक पहुंचने वाले नेपाल के सबसे छोटे त्रिदेशीय व्यापारिक मार्ग का हिस्सा है। राष्ट्रीय गौरव की इस परियोजना के अंतर्गत बन रहा कोशी राजमार्ग कुल 390 किलोमीटर लंबा है।
खाँदबारी–किमाथाङ्का सड़क खंड 165 किलोमीटर लंबा है और सड़क निर्माण के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र भी यही माना जाता है। इसी दुर्गम क्षेत्र में 10.81 किलोमीटर सड़क ट्रैक खोलने तथा स्तरोन्नति का कार्य पूरा किया गया है।
परियोजना प्रमुख सिंह के अनुसार निर्माण शुरू होने के करीब पांच वर्ष बाद सेना ने इस सड़क खंड को पूरा कर हस्तांतरित किया है। मंगलवार को आयोजित हस्तांतरण कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय के उपसचिव रामेश्वर पोख्रेल और प्रेम प्रसाद न्यौपाने सहित उत्तर–दक्षिण कोशी सड़क कार्यालय के प्रमुख रामबहादुर गुरुङ भी उपस्थित थे।
नेपाली सेना ने २०७७ फागुन 24 गते च्याम्ताङ–घोङ्गप्पा सड़क निर्माण कार्य शुरू किया था। उत्तर–दक्षिण कोशी सड़क योजना के प्रमुख गुरुंग ने कहा कि कठिन भूगोल, दुर्गम वातावरण और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद सेना ने अपनी जिम्मेदारी सफलतापूर्वक पूरी की है। उन्होंने बताया कि सेना ने निर्धारित समय में गुणवत्तापूर्ण ढंग से सड़क निर्माण कार्य सम्पन्न किया।
खाँदबारी–किमाथाङ्का सड़क खंड के कुल 162 किलोमीटर में से 10.81 किलोमीटर सड़क निर्माण की जिम्मेदारी सेना को दी गई थी। कठिन चट्टानों और विकट भूगोल के कारण सेना ने हेलिकॉप्टर के माध्यम से निर्माण सामग्री ढुवानी कर सड़क निर्माण कार्य किया।
नेपाल–चीन सीमा पर स्थित किमाथाङ्का नाका भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत दुर्गम माना जाता है। किमाथाङ्का–जोगबनी सड़क खंड को चीन और भारत को जोड़ने वाला सबसे छोटा सड़क मार्ग माना जाता है। कठोर चट्टानों को तोड़ने के लिए विस्फोटक पदार्थों की आवश्यकता होने के कारण ६ वर्ष पहले मंत्रिपरिषद बैठक ने सेना को सड़क निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी थी।
किमाथाङ्का–जोगबनी सड़क खंड संचालन में आने के बाद कोशी प्रदेश के सङ्खुवासभा, धनकुटा, तेह्रथुम, सुनसरी, मोरङ, झापा और भोजपुर जिले के लोग प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि सड़क विस्तार के साथ इस क्षेत्र में व्यापार और व्यवसाय भी बढ़ेगा।
सड़क संचालन शुरू होने के बाद अब सीमा क्षेत्र में भन्सार कार्यालय (कस्टम कार्यालय) स्थापना का कार्य बाकी है। परियोजना कार्यालय के अनुसार खाँदबारी–किमाथाङ्का सड़क निर्माण में अब तक 62 करोड़ 36 लाख 67 हजार रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
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