भारत-नेपाल संबंधों में निर्णायक बदलाव के अवसर मौजूद, सहयोग और समन्वय जरूरी: जयशंकर

नई दिल्ली, 06 जून (हि.स.)। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शनिवार को अपने नेपाली समकक्ष के साथ वार्ता में सहयोग और समन्वय का स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास, सद्भावना और पारस्परिक लाभ पर आधारित विशेष संबंध हैं, जिन्हें और मजबूत बनाया जा सकता है। हमें लगता है कि भारत-नेपाल संबंधों के निर्णायक रूप से बदलने और संबंधों की पूरी क्षमता का एहसास करने के अवसर मौजूद हैं।

विदेश मंत्री जयशंकर और नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के बीच आज ताज महल होटल में मुलाकात हुई। वार्ता की शुरुआत में अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि भारत और नेपाल के संबंध जीवंत जन-से-जन संपर्क, खुली सीमा तथा साझा सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं की मजबूत नींव पर खड़े हैं।

उन्होंने उल्लेख किया कि दोनों देश अपनी लंबी और अनूठी खुली सीमा पर सुरक्षा बनाए रखने के लिए घनिष्ठ सहयोग करते हैं। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बावजूद भारत ने नेपाल को निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित की है।

जयशंकर ने कहा कि व्यापार, वाणिज्य, निवेश, ऊर्जा, विकास सहयोग, शिक्षा, आपदा राहत और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। इसके साथ ही स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सूचना प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस प्रतिबद्धता को दोहराया कि भारत नेपाल के साथ पारस्परिक प्रगति, समृद्धि और जनकल्याण के लिए मिलकर काम करता रहेगा।

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने अपने शुरुआती वक्तव्य में कहा कि उनकी सरकार भारत के साथ संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा कि नई सरकार उद्देश्यपूर्ण, ठोस और उच्चतम स्तर पर सहयोग के लिए तैयार है। उन्होंने भारत को नेपाल का सबसे महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल ऐतिहासिक नहीं हैं बल्कि संकट के समय भी भारत ने नेपाल का साथ दिया है।

उन्होंने पश्चिम एशिया संकट के दौरान ईंधन और उर्वरक आपूर्ति सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

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