रामगढ़, 21 मई (हि.स.)। डीसी की चल संपत्ति कुर्की करने का आदेश जिस मामले में आया है, वह मामला बरका सायल सीसीएल प्रक्षेत्र से जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद रामगढ़ डीसी ऋतुराज की पहल पर 25 मई से पहले सीसीएल पूरी रकम जमा करने के लिए तैयार हो गया है।
डीसी ऋतुराज की ओर से बनाए गए दबाव के कारण 22 साल के बाद सीसीएल प्रबंधन पूरी रकम कोर्ट में जमा करने के लिए तैयार हो गया है। सीसीएल प्रबंधन ने बरका सायल प्रक्षेत्र में वर्ष 1986 में भूमि का अधिग्रहण किया गया था। सीसीएल की ओर से प्रस्तावित मुआवजा राशि पर ग्रामीणों ने सहमति नहीं जताई। उन्होंने सीसीएल प्रबंधन से अधिक मुआवजे की मांग रखी थी। जब ग्रामीणों ने कोर्ट में मुकदमा दायर किया, तब उन्होंने सीधे रामगढ़ डीसी को पार्टी बनाया।
अधिग्रहण के बाद ग्रामीणों की जमीन का इस्तेमाल सीसीएल प्रबंधन कर रहा था। मुआवजा भुगतान भी सीसीएल प्रबंधन को ही करना था। लेकिन ग्रामीणों ने सीधा जिला प्रशासन को पार्टी बनाकर मुआवजे की रकम में बढ़ोतरी करने की फरियाद कोर्ट से की।
कोर्ट ने वर्ष 2004 में 15 प्रतिशत ब्याज जोड़कर ही रकम देने का आदेश दिया था। लेकिन तब सीसीएल प्रबंधन उस राशि को देने पर राजी नहीं हुआ। बाद में मामला काफी खींचता चला गया और 16 सितंबर 2025 को रामगढ़ कोर्ट ने कुल रकम ब्याज के साथ 87.43 लाख कोर्ट में जमा करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद सीसीएल प्रबंधन ने रकम कोर्ट में जमा नहीं की। इसके बाद 19 मई 2026 को कोर्ट ने रामगढ़ डीसी की चल संपत्ति की कुर्की का आदेश दे दिया।
कोर्ट ने 19 मई को सबसे पुराने वाद में फैसला सुनाया था। यह आदेश लैंड रेफरेंस केस संख्या 26/1986 और संबंधित लैंड एक्विजिशन एग्जीक्यूशन केस में पारित किया गया था। यह वाद लैंड एक्विजिशन एग्जीक्यूशन के मामले में रामगढ़ न्याय मंडल का सबसे पुराना वाद है। अदालत के अनुसार वर्ष 2004 में पारित अवार्ड के तहत अवार्ड धारक याचिकाकर्ता को भुगतान किया जाना था। जिसमें मूल मुआवजा राशि और 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज शामिल है। न्यायालय ने कहा कि अब तक कुल 87,43,824.73 का भुगतान नहीं किया गया है।
कोर्ट का फैसला आने के बाद रामगढ़ जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। रामगढ़ डीसी के निर्देश पर अपर समाहर्ता कुमारी गीतांजलि ने पूरे मामले की मॉनिटरिंग की। उन्होंने गवर्नमेंट प्रॉसिक्यूटर से पूरे मामले की जानकारी ली। जिला प्रशासन ने सीसीएल प्रबंधन से भी वार्ता की और उन पर मुआवजा रकम भुगतान करने को कहा। साथ ही कोर्ट में यह क्लोज़ भी लगाने को कहा कि अगर झारखंड उच्च न्यायालय से ग्रामीणों के खिलाफ फैसला आता है तो वह रकम वापस ली जाएगी।
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