रामगढ़ जिलालय में हुआ मुनि सुयश सागरजी का मंगल प्रवेश

मंदिर में शामिल जैन धर्म के लोग

रामगढ़, 02 जुलाई (हि.स.)। रामगढ़ शहर के श्री दिगंबर जैन मंदिर में पूज्य आचार्य भगवन, गणाचार्य एवं चर्या शिरोमणि मुनिश्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनिश्री 108 सुयश सागर जी एवं मुनिश्री 108 कौशल्य सागर जी का गुरुवार को रामगढ़ में मंगल प्रवेश हुआ।

उल्लेखनीय है कि मुनिश्री का बिहार, झुमरीतिलैया की ओर हो रहा है जहां इनका चातुर्मास होना सुनिश्चित हुआ है। मुनिश्री के नगर प्रवेश पर उनकी भव्य अगवानी की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु हाथों में जैनागम का ध्वज लेकर झूमते गाते शामिल हुए। जिलालय प्रवेश पर उनका पाद प्रच्छालन हुआ। प्रवेश के बाद अपने प्रवचन में मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य अपने अपराधों को दूसरों से छिपा सकता है, परन्तु स्वयं एवं स्वयंभू अथार्थ भगवान के सामने सच्चाई आ ही जाती है। इसके अलावा मुनिश्री ने जीवन के उद्देश्य और आत्म कल्याण के संबंध में अपना सारगर्भित विवेचन भक्तों को बताया।

वहीं कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए जैन समाज के सचिव योगेश सेठी ने बताया कि विगत कुछ दिनों से रामगढ़ समाज के सौभाग्य के द्वार खुल गए हैं। इस कारण लगातार साधु-संतों का सानिध्य प्राप्त हो रहा है, जिससे समाज में एक नई आस्था का संचार हो रहा है। बाद में उपस्थित समाज के सदस्यों के साथ मुनिश्री को श्रीफल अर्पित करते हुए सेठी ने मुनिश्री से कुछ दिनों का प्रवास का निवेदन किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में उपाध्यक्ष राजू पटनी, सुनील छाबड़ा, राजेश चूड़ीवाल, संजय सेठी, निशांत सेठी अनंत सेठी, अशोक चूड़ीवाल, अरविंद सेठी, नितिन पाटनी, राहुल पाटनी, सुभाष सेठी, जैन समाज के मीडिया प्रभारी श्रवण जैन का योगदान रहा।

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