एनसीएसटी सदस्य आशा लकड़ा ने रांची-डीएसपीएमयू से सात दिन में रिपोर्ट मांगी

रांची, 08 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने बुधवार को रांची विश्वविद्यालय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) में जनजातीय छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को मिल रही सुविधाओं, प्रोन्नति, पे-फिक्सेशन तथा छात्रवृत्ति व्यवस्था की समीक्षात्‍मक बैठक की। इस दौरान आयोग ने दोनों विश्वविद्यालयों को सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है, जिसके आधार पर राज्य सरकार, विश्वविद्यालयों और यूजीसी को अनुशंसाएं भेजी जाएंगी।

इस मौके पर आशा लकड़ा ने कहा कि विश्वविद्यालयों के पास नियुक्ति, प्रोन्नति और सेवा संबंधी मामलों में पर्याप्त अधिकार नहीं हैं तथा अधिकांश निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर होते हैं। उन्होंने ट्राइबल प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए आयोजित जेपीएससी परीक्षा का परिणाम लंबित रहने, वर्षों से प्रोन्नति और पे-फिक्सेशन नहीं होने तथा अनुकंपा पर नियुक्त कर्मचारियों को भी पदोन्नति नहीं मिलने पर चिंता जताई।

उन्होंने क्लस्टर प्रणाली में खड़िया और संताली भाषा को एक साथ रखने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे जनजातीय भाषाओं के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। साथ ही जनजातीय विभागों में पीएचडी गाइड की कमी के कारण जेआरएफ चयनित विद्यार्थियों के शोध कार्य बाधित होने का मुद्दा भी उठाया। आयोग ने यूजी और पीजी दोनों स्तर के जनजातीय टॉपर्स को छात्रवृत्ति देने, विश्वविद्यालयों में इंटरनल ग्रीवांस रिड्रेसल सेल और लायजन ऑफिसर नियुक्त करने तथा यूजीसी की गाइडलाइन के अनुरूप विश्वविद्यालयों को अधिक प्रशासनिक अधिकार देने की आवश्यकता पर बल दिया।

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