हेवी ब्लास्टिंग से दहशत में नराईबोध के ग्रामीण, मांगें नहीं मानी तो एसईसीएल मुख्यालय घेरने की चेतावनी

हेवी ब्लास्टिंग से दहशत में नराईबोध के ग्रामीण, घरों पर पत्थर गिरने का आरोप; मांगें नहीं मानी गईं तो SECL गेवरा मुख्यालय घेरने की चेतावनीहेवी ब्लास्टिंग से दहशत में नराईबोध के ग्रामीण, घरों पर पत्थर गिरने का आरोप; मांगें नहीं मानी गईं तो SECL गेवरा मुख्यालय घेरने की चेतावनीहेवी ब्लास्टिंग से दहशत में नराईबोध के ग्रामीण, घरों पर पत्थर गिरने का आरोप; मांगें नहीं मानी गईं तो SECL गेवरा मुख्यालय घेरने की चेतावनीहेवी ब्लास्टिंग से दहशत में नराईबोध के ग्रामीण, घरों पर पत्थर गिरने का आरोप; मांगें नहीं मानी गईं तो SECL गेवरा मुख्यालय घेरने की चेतावनी

कोरबा, 06 जुलाई (हि. स.)। एसईसीएल की गेवरा परियोजना में लगातार हो रही हेवी ब्लास्टिंग अब आसपास के ग्रामीणों के लिए भय और असुरक्षा का कारण बनती जा रही है। परियोजना से लगे ग्राम नराईबोध के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि रोजाना होने वाले तेज विस्फोटों से उनके मकानों में दरारें पड़ रही हैं, छतों पर पत्थर गिर रहे हैं और पूरा गांव दहशत के साये में जीने को मजबूर है।

ग्रामीणों के मुताबिक, प्रतिदिन दोपहर के समय होने वाली भारी ब्लास्टिंग के दौरान पूरे गांव में तेज कंपन महसूस होता है। उनका कहना है कि लगातार हो रहे विस्फोटों से कई मकानों की दीवारों में दरारें आ गई हैं। बारिश के मौसम में इन क्षतिग्रस्त मकानों के गिरने का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे लोगों में लगातार डर बना हुआ है।

ग्रामीणों ने आज साेमवार काे जानकारी देते हुए बताया कि हाल ही में ब्लास्टिंग के दौरान एक बड़ा पत्थर उड़कर एक मकान की एस्बेस्टस शीट को तोड़ते हुए सीधे कमरे के अंदर आ गिरा। उस समय परिवार के सदस्य घर के भीतर मौजूद थे, लेकिन संयोगवश किसी को चोट नहीं आई। पीड़ित परिवार का कहना है कि अगले दिन जब क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत की जा रही थी, तब उसी स्थान पर फिर से पत्थर गिरा, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि खदान में लगातार हो रही ब्लास्टिंग का असर क्षेत्र के बोरवेल और कुओं पर भी पड़ रहा है। उनका कहना है कि कई जल स्रोत प्रभावित हुए हैं, जिससे गांव में पेयजल संकट गहराने लगा है। उन्होंने प्रशासन और परियोजना प्रबंधन से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।

घटना की जानकारी मिलने के बाद एसईसीएल के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। ग्रामीणों के अनुसार अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त एस्बेस्टस शीट बदलने और हुए नुकसान की भरपाई का आश्वासन दिया है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि केवल मुआवजा देना पर्याप्त नहीं है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ब्लास्टिंग की प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने और प्रभावी सुरक्षा उपाय लागू करने की आवश्यकता है।

रोजगार के मुद्दे पर भी ग्रामीणों ने एसईसीएल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि परियोजना से प्रभावित कई पात्र परिवारों के सदस्यों को अब तक नियमानुसार रोजगार नहीं मिला है, जबकि अन्य मामलों में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। ग्रामीणों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कर पात्र हितग्राहियों को शीघ्र रोजगार देने की मांग की है।

विस्थापन और पुनर्वास को लेकर भी ग्रामीणों ने असंतोष जताया है। उनका आरोप है कि बसाहट स्थल के विकास और समतलीकरण के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य अपेक्षित गति से नहीं हो रहा है। इसके कारण विस्थापन की पूरी प्रक्रिया और सर्वे कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि उनकी समस्याओं को लेकर पहले भी कई त्रिपक्षीय बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक किसी भी प्रमुख मांग पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उनका आरोप है कि लगातार आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं निकल रहा है।

ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो ग्राम नराईबोध के सभी लोग एकजुट होकर एसईसीएल गेवरा मुख्यालय का घेराव करेंगे और व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान यदि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रबंधन और प्रशासन की होगी।

   

सम्बंधित खबर