शिमला में चार लेबर कोड के खिलाफ सीटू का प्रदर्शन, प्रतियां जलाईं
- DSS Admin
- May 12, 2026
शिमला, 12 मई (हि.स.)। केंद्र सरकार के चार लेबर कोड के विरोध में सीटू ने मंगलवार को शिमला में प्रदर्शन किया और डीसी ऑफिस के बाहर इन कोडों की प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। सीटू कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार पर मजदूर विरोधी नीतियां लागू करने का आरोप लगाया और चारों लेबर कोड तुरंत वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान सीटू नेताओं ने कहा कि पुराने 29 श्रम कानूनों को खत्म कर बनाए गए नए लेबर कोड मजदूरों के अधिकार कमजोर करेंगे। संगठन ने इन्हें मजदूरों की गुलामी का दस्तावेज बताते हुए कहा कि इससे उद्योगपतियों और कंपनियों को ज्यादा फायदा मिलेगा, जबकि मजदूरों की सुरक्षा और अधिकारों पर असर पड़ेगा।
सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि नए कानूनों के जरिए काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 घंटे तक किए जाने की तैयारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कानूनों से मालिकों को कर्मचारियों को अपनी मर्जी से रखने और निकालने की छूट मिल जाएगी। साथ ही ट्रेड यूनियन बनाने और हड़ताल करने के अधिकार भी सीमित हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि महंगाई के इस दौर में मजदूरों को सम्मानजनक न्यूनतम वेतन नहीं मिल रहा है और सामाजिक सुरक्षा भी कमजोर की जा रही है।
उन्होंने कहा कि चारों लेबर कोड लागू होने से बड़ी संख्या में उद्योग और औद्योगिक मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे। इससे ईपीएफ, ईएसआई और बोनस जैसी व्यवस्थाओं पर असर पड़ेगा। सीटू का आरोप है कि इन कानूनों से ठेका और आउटसोर्स कर्मचारियों की सुरक्षा कम होगी और फिक्स टर्म रोजगार तथा हायर एंड फायर नीति को बढ़ावा मिलेगा।
विजेंद्र मेहरा ने कहा कि केंद्र सरकार ने मजदूर संगठनों के विरोध और उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए एकतरफा तरीके से ये कानून बनाए हैं। उन्होंने कहा कि वेतन कोड 2019, औद्योगिक संबंध कोड 2020, सामाजिक सुरक्षा कोड 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थिति कोड 2020 मजदूरों के लोकतांत्रिक अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और श्रम कल्याण की अवधारणा को कमजोर करते हैं।
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