लखनऊ में बॉस स्कैम के जरिए व्यवसायी से 18 लाख की ठगी, साइबर क्राइम ने 10.85 लाख कराया वापस
- DSS Admin
- Jul 06, 2026
लखनऊ, 06 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पहली बार सामने आए बॉस स्कैम (सीईओ प्रतिरूपण धोखाधड़ी) का खुलासा साइबर क्राइम सेल ने किया है। पीड़ित के खाते में 10.85 लाख रुपये वापस लौटए हैं। साथ ही साथ मध्य प्रदेश के ग्वालियर से तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। शेष रिकवरी एवं अभियुक्तों की गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है।
अपर पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) किरन यादव ने सोमवार को बताया कि बॉस स्कैम का शिकार बने लखनऊ के मशहूर व्यवसायी कलकत्ता रेगलिया के अकाउंटेंट से व्हाट्सएप पर व्यवसायी के पुत्र बनकर मालवेयर युक्त संदेश भेजकर 18 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई थी। इसका सफल अनावरण साइबर क्राइम सेल ने किया है।
साइबर सेल ने संबंधित बैंकों, पेमेंट एग्रीगेटर्स एवं अन्य संस्थाओं से त्वरित समन्वय स्थापित कर संदिग्ध बैंक खातों को चिन्हित किया गया। फ्रॉड की गई धनराशि को सुरक्षित कराने के लिए लगातार प्रभावी फॉलो-अप किया गया। सतत प्रयासों के फलस्वरूप पूर्व में दो भागों में दस लाख पचासी हजार रुपये की ठगी गई धनराशि पीड़ित को वापस कराई जा चुकी है। शेष धनराशि की रिकवरी, साइबर अपराधियों की पहचान एवं गिरफ्तारी के लिए तकनीकी एवं विधिक कार्रवाई निरंतर प्रचलित है।
ठगी के रकम का आधा रुपया वापस होने के बाद पीड़ित ने सोमवार को लखनऊ साइबर क्राइम पुलिस का हृदय से आभार व्यक्त किया है। उसने कहा कि जब मेरे साथ 18 लाख की साइबर ठगी हुई तो मुझे लगा कि मेरी पूरी धनराशि वापस मिलना लगभग असंभव है। लेकिन थाना साइबर क्राइम की टीम ने मेरी शिकायत को गंभीरता से लिया। पुलिस की तत्परता, तकनीकी दक्षता एवं संवेदनशील कार्यप्रणाली के लिए मैं पूरी टीम का धन्यवाद करता हूँ।
एडीसीपी ने बताया कि ठगी के लिए साइबर अपराधी लगातर नए—नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। इन्हीं नए तरीकों में यह बॉस स्कैम तेजी से उभरकर सामने आया है । यह साइबर अपराध का ऐसा संगठित स्वरूप है जिसमें अपराधी किसी कंपनी के मालिक, निदेशक अथवा वरिष्ठ अधिकारी का प्रतिरूप धारण करते हैं। अपराधी पहले सोशल मीडिया, कंपनी की वेबसाइट, लिंकडिन, फेसबुक और इस्टाग्राम एवं अन्य सार्वजनिक स्रोतों से कंपनी तथा उसके अधिकारियों की जानकारी एकत्र करते हैं। इसके बाद समान प्रोफाइल फोटो एवं नाम का उपयोग कर फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट, ई-मेल अथवा मोबाइल नंबर बनाते हैं।
इसके बाद अकाउंट या फाइनेंस विभाग के कर्मचारी को संदेश भेजकर कहा जाता है कि, “मैं मीटिंग में हूँ, कॉल मत करना।”
“यह गोपनीय भुगतान है।” “अभी तुरंत भुगतान करना है।” “डील फाइनल करनी है, देर नहीं होनी चाहिए। अपराधी कर्मचारी को मानसिक दबाव एवं विश्वास में लेकर धनराशि अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करा लेते हैं।
उन्होंने इस तरह के साइबर अपराधों से बचने के लिए यह भी बताया कि साइबर अपराधी तकनीक के साथ-साथ मानवीय विश्वास एवं मनोविज्ञान का भी दुरुपयोग कर रहे हैं। बॉस स्कैम में अपराधी स्वयं को कंपनी का मालिक, वरिष्ठ अधिकारी अथवा उनके परिजन बताकर कर्मचारियों पर तत्काल भुगतान का दबाव बनाते हैं। किसी भी वित्तीय निर्देश का पालन केवल व्हाट्सएप संदेश, प्रोफाइल फोटो या ई-मेल के आधार पर कभी न करें। संबंधित अधिकारी से उनके आधिकारिक मोबाइल नंबर अथवा अन्य विश्वसनीय माध्यम से स्वतंत्र रूप से सत्यापन अवश्य करें। प्रत्येक संस्था को वित्तीय लेन-देन के लिए टू लेविल वैरीफिकेशन और माकर चेकर प्रणाली अपनानी चाहिए। समय पर शिकायत दर्ज होने पर धनराशि की रिकवरी की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। यदि कोई भी व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार होता है तो तत्काल 1930 हेल्पलाइन अथवा एनसीसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
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