महाराष्ट्र में टीईटी पेपर लीक, परीक्षा रद्द, 3 गिरफ्तार

मुंबई, 27 जून (हि.स.)। नीट पेपर लीक मामले को लेकर चल रहे विवाद के बीच महाराष्ट्र में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का पेपर लीक होने से हड़कंप मच गया है। टीईटी के प्रश्न पत्र का 1.5 करोड़ रुपये में सौदा होने वाला था। प्राथमिक जांच में इसका दिल्ली कनेक्शन सामने आ रहा है। इस मामले में 3 संदिग्ध आरोपिताें को हिरासत में लिया गया है। महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद, पुणे ने रविवार 28 जून को होने वाली परीक्षा को रद्द कर उसकी तारीख आगे बढ़ा दी है। इधर विपक्षी दलों ने महायुति सरकार पर निशाना साधा है।

एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस अशोक दुधे ने भिवंडी में प्रेस वार्ता में जानकारी दी कि एक गोपनीय सूचना के आधार पर पता चला था कि भिवंडी में कुछ लोगों को इस प्रश्न पत्र के बारे में जानकारी है। इसके आधार पर भिवंडी पुलिस ने उस स्थान पर छापा मारा। इसके बाद परिषद के अधिकारियों को सत्यापन के लिए बुलाया गया। जांच में पाया गया कि टीईटी के प्रश्न पत्र में उन लोगों के पास एक जैसे प्रश्न थे। इस संबंध में भिवंडी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। परिषद ने भी इस संबंध में एक नोटिस जारी किया है।

उन्होंने बताया कि जांच टीम एक बड़े अंतर्राज्यीय रैकेट की जांच कर रही है। परिषद के अधिकारियों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जांच के बाद परीक्षा की नई तारीख तय की जाएगी। परीक्षा के बारे में अपडेटेड जानकारी जल्द परिष्द की वेबसाइट पर पब्लिश की जाएगी। पंजीकरण के लिए परीक्षार्थियों को फिर से शुल्क नहीं देना होगा। ठाणे के कोनगांव पुलिस स्टेशन की सीमा में तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस टीम ने कोनगांव के डायमंड होटल में छापा मारा। लेकिन संदिग्ध वहां नहीं मिले। उसके बाद पुलिस टीम ने सहारा एयरपोर्ट इलाके से तीन लोगों को हिरासत में लिया है। इनके पास से टीईटी के प्रश्न मिले हैं. भिवंडी पुलिस आगे की जांच कर रही है।

नीट के बाद टीईटी पेपर लीक होने के बाद पूरे राज्य में जबरदस्त गुस्सा है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, कांग्रेस नेता विजय वटेट्टीवार सहित तमाम नेताओं ने राज्य सरकार को घेरा है। शिनसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने कहा कि भाजपा को संविधान बदलने के लिए पार्टी को तोड़ने के बजाय बार-बार हो रहे पेपर लीक को रोकने पर ध्यान देना चाहिए। भाजपा ने देश का भविष्य बर्बाद कर दिया है। पिछले दस वर्षों में महाराष्ट्र में ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं। इससे हमारे राज्य की बदनामी हुई है। क्या युवाओं को हर साल सिर्फ विरोध करना चाहिए? हमारे देश के युवा अपने भविष्य के सपने कब देखेंगे?

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