सूरजपुर, 22 जून (हि.स.)। कृषि को आधुनिक, आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाने की दिशा में नैनो उर्वरक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। किसानों को अब परंपरागत रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया प्लस अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे फसल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर बनाए रखी जा सके।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो उर्वरक मिट्टी की उर्वरा शक्ति और जैविक संतुलन को बनाए रखने में सहायक होते हैं। इनके उपयोग से भूजल प्रदूषण और रासायनिक अवशेषों में कमी आती है, जबकि पौधों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी और त्वरित रूप से उपलब्ध हो पाते हैं। इससे पर्यावरण-अनुकूल एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा मिलता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से उत्पादन लागत कम होती है और फसलों की उत्पादकता में सुधार देखने को मिलता है। तरल स्वरूप में उपलब्ध होने के कारण इनका भंडारण और परिवहन भी आसान है। साथ ही ड्रोन और स्प्रे तकनीक के माध्यम से इनका छिड़काव सरलता से किया जा सकता है, जिससे किसानों के समय और श्रम दोनों की बचत होती है।
कृषि विभाग ने किसानों से नैनो उर्वरकों के उपयोग को अपनाने की अपील करते हुए कहा है कि यह तकनीक भविष्य की टिकाऊ खेती की दिशा में एक प्रभावी कदम है। इसके माध्यम से किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के साथ-साथ मिट्टी और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

