इंद्रावती जलसंकट सुलझाने सीएम और बस्तरवासियोंं के बीच सेतु बनकर काम करेंगे : शरद अवस्थी
- DSS Admin
- Jun 24, 2026
जगदलपुर, 24 जून (हि.स.)। इंद्रावती नदी कछार विकास प्राधिकरण के नए उपाध्यक्ष शरद अवस्थी इंद्रावती नदी जल संकट की समस्या के समाधान, संंरक्षण और बस्तर में सिंचाई याेजनाओं की समय पर स्वीकृति और निर्माण की गति तेज करने बस्तरवासियोंं और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के बीच सेतु बनकर काम करेंगे।
प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनकर दिखावे की राजनीति करने में उनकी रूचि नही होगी बल्कि इस अवसर को बस्तर की प्राणदायिनी इंद्रावती के सेवादार के रूप में स्वीकार करेेंगे। पदभार ग्रहण करने के बाद आज बुधवार काे सर्किट हाउस में इंद्रावती नदी बचाओ अभियान के सदस्यों के साथ बैठक कर शरद अवस्थी ने अपनी मंशा बताई और सुझाव भी सुने। इस दौरान जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री पीआर मरकाम, सहायक यंंत्री भरत बघेल, निर्मल पांडे आदि भी उपस्थित
तीन घंटे तक चली बैठक में शरद अवस्थी ने विस्तार से बताया कि प्राधिकरण उपाध्यक्ष के रूप में कार्य को लेकर उनकी प्राथमिकताएं क्या होंगी। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पास जलसंसाधन विभाग का प्रभार भी है। प्राधिकरण के अध्यक्ष भी वही हैं। मुख्यमंत्री का विभाग होने से सिंचाई सुविधाओं में बस्तर के पिछड़ेपन को दूर करने में मदद मिलेगी। मटनार और देउरगांव बैराज का समय पर निर्माण हो यह सर्वोच्च प्राथमिकता का विषय होगा। शरद अवस्थी का कहना था कि प्राधिकरण की अगली बैठक में इंद्रावती नदी बचाओ अभियान के प्रतिनिधिमंडल काे भी आमंत्रित किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णदेव साय से मुलाकात के लिए भी टीम को रायपुर ले जाएंगे।
इंद्रावती बचाओ अभियान समिति से मिले कई सुझावों पर सहमति व्यक्त करते हुए शरद अवस्थी ने कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा के सीमा पर भेजापदर में इंद्रावती नदी के जलबहाव को मापने गेज साइट की स्थापना के लिए पहल की जाएगी। इंद्रावती नदी-जोरा नाला संंगम से बस्तर की ओर जलबहाव में बाधा बन रहे रेत के टीलों को हटाने ओडिशा शासन काे छग शासन की ओर से पत्र भेजा जाएगा। गैर मानसून सीजन में इंद्रावती नदी से ओडिशा से बस्तर को 8.115 टीएमसी पानी की मांग और दोनों राज्यों के बीच इंद्रावती जल विवाद के मुद्दे को सुलझाने दोनों राज्यों के बीच द्विपक्षीय बैठक के लिए मुख्यमंत्री से अनुरोध किया जाएगा। समझौते के तहत गैर मानसून सीजन में दोनों राज्यों के बीच इंद्रावती का आधा-आधा पानी बांटने का प्रविधान है, लेकिन छग को उसके हक का पानी नहीं मिल पाता है।
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