बजट में वेतन बढ़ोतरी की घोषणा के बाद भी एनएचएम कर्मचारियों में संशय, सरकार से मांगी स्पष्टता
- DSS Admin
- Jun 30, 2026
शिमला, 30 जून (हि.स.)। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा मार्च में पेश किए गए बजट में वेतन वृद्धि की घोषणा के बाद नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों में नई उम्मीद जगी थी। प्रदेश भर में कार्यरत हजारों कर्मचारियों को लगा था कि लंबे समय से लंबित उनकी मांगों पर अब ठोस कदम उठेंगे और वेतन से जुड़ी स्थिति स्पष्ट होगी। हालांकि अब वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जारी प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन प्लान (पीआईपी) सामने आने के बाद कर्मचारियों के बीच कई सवाल खड़े हो गए हैं।
इन्हीं सवालों और आशंकाओं को लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति अनुबंध कर्मचारी संघ ने मिशन निदेशक को ज्ञापन सौंपा है।
संघ का कहना है कि 21 मार्च को विधानसभा में बजट भाषण के दौरान की गई घोषणाओं से कर्मचारियों में उत्साह था, लेकिन 25 जून को जारी पीआईपी में वेतन पुनरीक्षण के लिए कोई स्पष्ट वित्तीय प्रावधान दिखाई नहीं देता। ऐसे में कर्मचारियों के बीच यह जानने की उत्सुकता है कि बजट घोषणा को किस रूप में लागू किया जाएगा।
संघ के अनुसार पीआईपी में वेतन वृद्धि का अधिकतम प्रावधान 15 प्रतिशत तक रखा गया है, लेकिन यह प्रदर्शन मूल्यांकन (परफॉर्मेंस अप्रेजल) और वेतन युक्तिकरण की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।
कर्मचारियों का कहना है कि दस्तावेज में यह भी संकेत है कि यदि प्रदर्शन मूल्यांकन नहीं होता है तो वेतन वृद्धि केवल 5 प्रतिशत तक सीमित रह सकती है। इसी वजह से कर्मचारी यह स्पष्ट जानना चाहते हैं कि बजट में घोषित वेतन बढ़ोतरी का वास्तविक स्वरूप क्या होगा।
राज्य स्वास्थ्य समिति अनुबंध कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष अमीन चंद शर्मा ने कहा कि एनएचएम कर्मचारी पिछले लगभग 20 वर्षों से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कोविड महामारी सहित कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी कर्मचारियों ने अपनी जिम्मेदारियां निभाईं, लेकिन आज भी उनकी सेवा सुरक्षा और भविष्य से जुड़े कई मुद्दे लंबित हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को उम्मीद थी कि बजट घोषणा के बाद उनकी मांगों के समाधान की दिशा में स्पष्ट प्रगति दिखाई देगी।
संघ ने अपने ज्ञापन में सरकार से बजट घोषणा के अनुरूप वेतन पुनरीक्षण की प्रशासनिक और वित्तीय स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही नियमित सेवा नीति बनाने, सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने, ईपीएफ, ग्रेच्युटी, चिकित्सा सुविधाओं और अन्य कर्मचारी हितों से जुड़े मामलों पर समयबद्ध निर्णय लेने की मांग भी उठाई गई है।
संघ ने यह भी कहा है कि वर्तमान में दी जा रही अनुग्रह राशि की व्यवस्था में किसी प्रकार की कटौती नहीं की जानी चाहिए।
कर्मचारी संगठन का कहना है कि वह सरकार के साथ संवाद और सहयोग के माध्यम से समाधान चाहता है।
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