देउवा दंपति दो महीने के भीतर नेपाल लौटकर जांच में सहयोग करने को तैयार

काठमांडू, 17 जून (हि.स.)। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री तथा नेपाली कांग्रेस के पदच्युत सभापति शेरबहादुर देउवा ने आयकर विभाग को जानकारी दी है कि वे साउन 28 (लगभग अगस्त मध्य) तक नेपाल लौट आएंगे।

आयकर विभाग के महानिदेशक को

ई-मेल के माध्यम से भेजे गए पत्र में देउवा और उनकी पत्नी डॉ. आरजु राणा ने स्पष्ट किया है कि वे दो महीने के भीतर नेपाल वापस आकर विभाग की जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं। चार पृष्ठों के ई-मेल में उन्होंने अनुरोध किया है कि उपचाररत अवस्था में उनके बारे में 'देश छोड़कर भाग जाने' या 'जांच में उपस्थित न होने' जैसी धारणाएं बनाकर गिरफ्तारी वारंट जारी करने अथवा नेपाल वापसी में कठिनाई उत्पन्न करने वाली स्थिति न बनाई जाए।

ई-मेल में देउवा दंपति ने कहा है कि यद्यपि वे सार्वजनिक उत्तरदायित्व वाले पदों पर रह चुके हैं और देश के प्रधानमंत्री तथा विदेश मंत्री जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभा चुके राजनीतिक व्यक्ति हैं, फिर भी उनका उद्देश्य किसी तकनीकी आधार पर अपने खिलाफ चल रही जांच को रोकना या बाधित करना नहीं है। उनका लक्ष्य कानूनसम्मत, पारदर्शी और खुले प्रमाणों पर आधारित जांच के माध्यम से अपनी निर्दोषता सिद्ध करना है। उन्होंने प्रारंभिक रूप से ही यह स्पष्ट किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

हालांकि, ई-मेल में देउवा दंपति ने यह उल्लेख नहीं किया है कि वे वर्तमान में किस देश में रह रहे हैं। वे काठमांडू से उपचार के लिए सिंगापुर गए थे। इसके बाद उन्हें हांगकांग में भी देखा गया था, लेकिन उसके बाद से उनके ठिकाने के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

विभाग को भेजे गए ई-मेल में उन्होंने यह भी स्मरण कराया है कि उनके खिलाफ किसी प्रकार की धरपकड़ न करने संबंधी अंतरिम आदेश सर्वोच्च अदालत पहले ही जारी कर चुका है। ई-मेल में कहा गया है कि अंतरिम सुनवाई के दौरान यह तर्क दिया गया था कि उनके खिलाफ जांच जारी है और भले ही अपराध साबित करने वाला कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला हो, लेकिन उनके नेपाल से बाहर होने के कारण उन्हें नेपाल लाने के लिए इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करना आवश्यक हो सकता है। अपने कानूनी प्रतिनिधियों से यह जानकारी मिलने के बाद उन्होंने यह निवेदन प्रस्तुत किया है।

देउवा ने यह भी बताया कि उनके खिलाफ दर्ज शिकायत के आधार पर जांच टीम गठित की गई थी और उनकी ध्वस्त हो चुकी इमारत में जांच भी की गई थी। इसके बावजूद 2082 फागुन 13 को नेपाल से बाहर जाने तक विभाग की ओर से उन्हें उपस्थित होने के लिए कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि उनके जले हुए घर में रह रहे रिश्तेदार राम बहादुर देउवा को विधिवत प्रवेश-पत्र देकर घर की सभी मंजिलों तथा आग से बची धातुओं और दस्तावेजों का निरीक्षण किया गया था। तलाशी पंचनामे में यह प्रमाणित किया गया कि वहां कोई बहुमूल्य वस्तु या नकदी जलने के प्रमाण नहीं मिले।

देउवा दंपति ने यह भी दावा किया है कि उनके खिलाफ एंटी करप्शन सहित किसी भी संवैधानिक निकाय द्वारा कोई जांच नहीं की जा रही है। साथ ही, सम्पत्ति शुद्धीकरण विभाग की जांच में भी कोई बहुमूल्य वस्तु बरामद नहीं हुई है, जिससे उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं होती।

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