नेपाल में प्रतिभूति, बीमा और बैंकिंग अपराध से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में देश का सबसे बड़ा मुकदमा अदालत पहुंचा

काठमांडू, 12 जून (हि.स.)। प्रतिभूति, बीमा और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े अपराधों के माध्यम से धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) करने के आरोप में नेपाल के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा मामला अदालत पहुंचा है। संपत्ति शुद्धीकरण (मनी लॉन्ड्रिंग) अनुसन्धान विभाग ने शुक्रवार को विशेष अदालत में 39 लोगों को प्रतिवादी बनाते हुए मामला दर्ज किया।

यह मामला उन व्यवसायियों के खिलाफ दर्ज किया गया है, जिन पर राजनीतिक संरक्षण के बल पर वित्तीय घोटाले और धोखाधड़ीपूर्ण कारोबारी नेटवर्क खड़ा करने का आरोप है।

नेपाल के सम्पत्ति शुद्धीकरण (मनी लॉन्ड्रिंग) अनुसन्धान विभाग के महानिदेशक निर्मल ढकाल ने बताया पांच महीने तक चले विस्तृत अनुसन्धान के बाद विशेष अदालत में आरोपपत्र दायर किया गया। ढकाल ने कहा, “यह नेपाल के इतिहास का सबसे बड़ा मामला है, जिसमें अब तक की सबसे अधिक राशि क्षतिपूर्ति के रूप में दावा किया गया है। हमने राज्य सत्ता और नियामक निकायों को व्यवस्थित रूप से प्रभावित कर किए गए संगठित वित्तीय अपराध की जांच की है।”

इससे पहले वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने आज सुबह प्रतिनिधि सभा की लेखा समिति की बैठक में कहा था कि देश के सबसे बड़े वित्तीय अपराध की जांच चल रही है और जल्द ही मामला अदालत में पहुंचने वाला है।

इसके बाद विभाग ने शुक्रवार दोपहर विशेष अदालत में औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज कराया।

विशेष अदालत में दायर आरोपपत्र में हिमालय रि इन्योरेंस लिमिटेड, नेपाल माइक्रो इंश्योरेंस लिमिटेड, हिमालयन सिक्योरिटी बैंकर लिमिटेड, सहित एक दर्जन कंपनियों के संचालकों के निदेशकों, वरिष्ठ अधिकारियों और नेपाल बीमा प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष पर अवैध वित्तीय कारोबार के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप लगाया गया है।

मामले में विवादास्पद व्यवसायी दीपक भट्ट , जिनके बारे में कहा जाता रहा है कि उनकी सरकार बनाने और गिराने तक की राजनीतिक पहुंच थी, तथा कोविड-19 महामारी के दौरान थर्मल गन की कालाबाजारी के आरोपों से चर्चित व्यवसायी सुलभ अग्रवाल उनकी पत्नी सुभी अग्रवाल सहित कुल 39 लोगों के खिलाफ अवैध कारोबार से अर्जित धन को वैध बनाने (मनी लॉन्ड्रिंग) का आरोप लगाया गया है।

संपत्ति शुद्धीकरण अनुसन्धान विभाग ने लंबे समय तक की गई जांच के बाद 39 प्रतिवादियों के विरुद्ध 1 खरब, 6 अरब, 2 करोड़, 50 लाख, 10 हजार 747 नेपाली रुपये के भ्रष्टाचार का दावा करते हुए अभियोगपत्र तैयार किया है। यह मामला न केवल मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के कारण, बल्कि कथित संगठित वित्तीय अपराध, राजनीतिक प्रभाव और नियामक संस्थाओं की भूमिका को लेकर भी नेपाल के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक अपराध मामलों में से एक माना जा रहा है।

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